चंद्रा ने कहा कि नोटबंदी से देश का कर आधार और प्रत्यक्ष कर से प्राप्त शुद्ध राजस्व बढ़ाने में मदद मिली है। अगर आप पिछले साल के आंकड़ों को देखें तो प्रत्यक्ष कर का योगदान 52 फीसदी और अप्रत्यक्ष कर का 42 फीसदी रहा है। यह कई वर्षों बाद हुआ है जब अप्रत्यक्ष की तुलना में प्रत्यक्ष कर बढ़ा है।
यह पूछे जाने पर कि नोटबंदी से इसमें कैसे मदद मिली तो चंद्रा ने कहा कि नोटबंदी के बाद लोगों ने पैसा अकाउंट में जमा कराया। इससे हमें यह जानने में मदद मिली कि कितने लोगों ने रिटर्न भरे बिना कितना कैश जमा कराया।
सीबीडीटी चेयरमैन ने बताया कि नोटबंदी के बाद टैक्स जमा नहीं कराने वाले करीब तीन लाख लोगों को नोटिस जारी किया गया था। ये वैधानिक नोटिस थे, जिसके बाद 2.25 लाख लोगों ने आईटी रिटर्न फाइल की। वहीं, 80 हजार ऐसे मामले हैं, जिनमें रिटर्न फाइल नहीं की गई। आयकर विभाग इनकी पड़ताल करने के साथ ही मूल्यांकन कर रहा है।