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भंडाफोड़: कर्नाटक के मेडिकल कॉलेजों में चल रहा था नकदी के बदले सीट का धंधा

Fri, 19 Feb 2021 01:56 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली

सार

  • आयकर विभाग ने खोली पोल, 400 करोड़ रुपये से ज्यादा के काले धन की जानकारी मिली।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : Social media
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विस्तार
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आयकर विभाग ने कर्नाटक के कुछ मेडिकल कॉलेजों में ‘नकदी के बदले मेडिकल सीट’ उपलब्ध कराने के धंधे का भंडाफोड़ किया है। सीबीडीटी ने बृहस्पतिवार को बताया कि इन संस्थानों द्वारा कैपिटेशन फीस के नाम पर 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का काला धन जुटाए जाने के सबूत मिले हैं।

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के मुताबिक, इस गोरखधंधे की जानकारी बुधवार को मेडिकल कॉलेज समेत विभिन्न शैक्षिक संस्थान चलाने वाली बंगलूरू और मंगलूरू में पंजीकृत नौ प्रमुख ट्रस्टों के कर्नाटक और केरल में 56 ठिकानों पर मारे गए छापे में मिली।

सीबीडीटी ने बताया कि छापों में मिले दस्तावेजों से 402.78 करोड़ रुपये अवैध तरीके से कैपिटेशन फीस के नाम पर जुटाए जाने के सबूत मिले हैं। यह फीस ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी करते हुए मनचाहे छात्रों को भर्ती करने के जरिये जुटाई गई थी। साथ ही इस कैपिटेशन फीस का ब्योरा आयकर विभाग के सामने नहीं दिया गया था। 
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सीबीडीटी के मुताबिक, तलाशी के दौरान ट्रस्टियों की तरफ से घाना में 2.39 करोड़ रुपये की अघोषित विदेशी संपत्ति के दस्तावेज भी मिले हैं। साथ ही 35 बेनामी लक्जरी कारों में किए गए भारी निवेश के भी सबूत पाए गए हैं।

15 करोड़ नकद व 30 करोड़ के आभूषण जब्त
सीबीडीटी ने बताया कि छापों के दौरान ट्रस्टियों के आवासों से आयकर टीमों को 15.09 करोड़ रुपये की नकदी के अलावा करीब 30 करोड़ रुपये कीमत के 81 किलोग्राम वजन के सोने के आभूषण जब्त किए गए। साथ ही 50 कैरेट हीरे और 40 किलोग्राम चांदी के सामान भी आयकर टीमों ने अपने कब्जे में लिए।

नीट में ऊंची रैंक वाले छात्र भी जुड़े गोरखधंधे में
सीबीडीटी ने मेडिकल कॉलेजों के ट्रस्टियों व संचालकों द्वारा राष्ट्रीय योग्यता व प्रवेश परीक्षा (नीट) के जरिये पारदर्शी तरीके से की जाने वाली चयन प्रक्रिया में भी लूपहोल तलाश लिए थे। इसके लिए एजेंटों के जरिये नीट परीक्षा में ऊंची रैंक पाने वाले कुछ छात्रों को भी अपने साथ जोड़ा गया था। ऊंची रैंक वाले छात्र काउंसिलिंग के जरिये इन संस्थानों में प्रवेश लेते थे, जबकि वे पहले से ही किसी अन्य कॉलेज में प्रवेश ले चुके होते थे।

बाद में ये छात्र इन इन संस्थानों से अपना नाम वापस ले लेते थे और ये सीट कॉलेज प्रबंधन के लिए खाली हो जाती थी। इसके बाद कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण काउंसिलिंग प्रक्रिया में एजेंटों, बिचौलियों और कन्वर्टरों (रेगुलर सीट को मैनेजमेंट सीट में बदलने वाले) के जरिये इन खाली सीटों को मनचाहे दामों पर कैपिटेशन फीस या डोनेशन के नाम पर बेचने का खेल किया जाता था।

कर्नाटक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन (प्रोहिबेशन ऑफ कैपिटेशन फीस) एक्ट के तहत गैरकानूनी होने के कारण यह कैपिटेशन फीस या डोनेशन नकद वसूली जाती थी, जो पूरी तरह से काला धन होता था। सीबीडीटी के मुताबिक, ऐसे काले धन के ब्योरे वाली विभिन्न सालों की दर्जनों नोटबुक, हाथ से लिखीं डायरियां, एक्सेल शीट बरामद की गई हैं।

प्रवेश के बाद उत्तीर्ण कराने का भी खेल
सीबीडीटी के मुताबिक, कुछ मेडिकल कॉलेजों में इन मैनेजमेंट कोटा छात्रों को प्रवेश के अलावा परीक्षा में उत्तीर्ण कराने का ‘पैकेज’ भी दिया जा रहा था, जिसके लिए एक लाख से लेकर दो लाख रुपये तक लिए जा रहे थे।

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