सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि असंगत निर्णय न्यायिक संस्थानों की गरिमा पर गंभीर प्रभाव डालते हैं और फैसला लिखते समय अदालतों को सुझाए गए दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि निर्णयों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से विकलांग लोगों के लिए सभी न्यायिक संस्थानों को निर्णयों और आदेशों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
वाटर मार्क पर भी टोका
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जजों के दिए निर्णय समाज के हर वर्ग, खासतौर पर दिव्यांग जनों की पहुंच में भी होने चाहिए। सभी न्यायिक संस्थाएं यह सुनिश्चित करें कि उनके यहां से जारी हो रहे निर्णयों में वाटर मार्क गलत जगहों पर न लगे हों। इससे दृष्टिहीन नागरिकों को स्क्रीन रीडर का उपयोग कर उन्हें पढ़ना असंभव हो जाता है।
तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत अर्जी पर 30 को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ की जमानत याचिका पर 30 अगस्त को सुनवाई करेगा। सीतलवाड़ को 2002 गोधरा दंगे के साक्ष्यों में छेड़छाड़ कर मासूम लोगों को फंसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। जस्टिस यूयू ललित की पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को गुजरात की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, सीतलवाड़ की याचिका पर जवाब तैयार है, उसमें कुछ सुधार करने की जरूरत है। हम हर हाल में शनिवार से पहले जवाब दाखिल कर दिया जाएगा। इस पर पीठ ने जवाब दाखिल करने के लिए 27 अगस्त तक का वक्त दिया और सुनवाई की अगली तारीख 30 अगस्त तय कर दी।