पंजाब में पराली जलाए जाने की घटना में बढ़ोतरी
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दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने में बड़ी हिस्सेदारी आसपास के राज्यों में पराली (फसलों के अवशेष) जलने की है। इसे रोकने को लेकर केंद्र सरकार ने दो साल में लगभग 18 सौ करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 46 फीसदी बढ़ गईं। हालांकि हरियाणा में पिछले साल के मुकाबले 28 फीसदी की कमी आई है।
पंजाब में 21 सितंबर से 22 नवंबर तक पराली जलाने की 76537 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि पिछले साल इनकी संख्या सिर्फ 52,225 थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पंजाब में पराली जलाने से रोकने को लेकर तमाम इंतजाम नाकाफी साबित हुए।
वहीं, हरियाणा में इस अवधि के दौरान पराली जलाने की 4675 घटनाएं हुईं, जो 2019 में 6551 थीं। पर्यावरण मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक तमाम सतर्कता बरतने के बावजूद पंजाब में पराली जलाने के खासे मामले आए, वहीं दूसरी ओर हरियाणा ने सजग कदम उठाकर पिछले साल की तुलना में पराली जलाने के मामलों को काफी हद तक नियंत्रित कर लिया।