Organisation of Islamic Cooperation
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जम्मू-कश्मीर पर ओआईसी के बयान पर भारत ने करारा जवाब दिया है। इस संबंध में मीडिया के सवालों के जवाब में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि जम्मू और कश्मीर पर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) के महासचिव द्वारा जारी बयान कट्टरता की बात करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और रहेगा। तीन साल पहले लंबे समय से प्रतीक्षित बदलावों के बाद आज यहां सामाजिक-आर्थिक विकास तेजी से हो रहा है।
उन्होंने कहा कि ओआईसी के महासचिव लगातार मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले और सीमा पार व अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के कुख्यात प्रायोजक की शह पर इस तरह का बयान देते हैं। ओआईसी के इस तरह के बयान बताता है कि वह सांप्रदायिक एजेंडा चलाने के लिए समर्पित है।
पांच अगस्त 2019 को हटाया गया था अनुच्छेद 370
केंद्र सरकार ने पांच अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था। आज इस फैसले के तीन साल पूरे हो गए हैं। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के तीन साल पूरे होने पर इस्लामिक सहयोग संगठन ने भारत सरकार को निशाने पर लिया।
ओआईसी ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, "पांच अगस्त 2022 भारत के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में की गई अवैध और एकतरफा कार्रवाई को तीन साल पूरे हो गए हैं। इसके बाद कश्मीर में गैरकानूनी ढंग से डेमोग्राफिक बदलावों सहित कई अवैध कदम उठाए गए थे। इस तरह के अवैध कदम न तो जम्मू कश्मीर की विवादित स्थिति को बदल सकते हैं और न ही कश्मीरी लोगों के आत्मनिर्णय के वैध अधिकार को खत्म कर सकते हैं।
ओआईसी ने जम्मू कश्मीर पर इस्लामिक समिट और विदेश मंत्रियों की परिषद की प्रस्तावना को याद करते हुए कहा कि हम कश्मीरी लोगों के आत्म निर्णय के उनके वैध अधिकारों का समर्थन करते हैं और उनके साथ खड़े हैं। इसके साथ ही ओआईसी ने कश्मीरी लोगों के मूलभूत और बुनियादी मानवाधिकारों के प्रति सम्मान और पांच अगस्त 2019 को या उसके बाद गैरकानूनी और एकतरफा ढंग से लिए गए फैसलों को वापस लेने की मांग की।