केंद्र ने सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि ऑनलाइन गेमिंग के संबंध में मसौदा विनियमन (ड्राफ्ट रेगुलेशन) प्रसारित किया गया है और वह इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। सरकार के वकील ने चीफ जस्टिस सतीश चंद्र और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच के सामने यह बयान दिया।
केंद्र के वकील ने शीर्ष कोर्ट को सूचित किया कि हितधारकों के साथ परामर्श शुरू हो गया है। कोर्ट ऑनलाइन गेमिंग के नियमन के संबंध में अतुल बत्रा और अविनाश मेहरोत्रा की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
वकील ने कहा, हितधारकों की बैठक में सभी प्रतिनिधियों के साथ मसौदा विनियमन परिचालित किया गया है और विचार विमर्श शुरू हो गया है। दो दौर (राउंड) हो चुके हैं। हमे इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। केंद्र के रुख को देखते हुए कोर्ट ने कहा कि वह आठ हफ्ते बाद इस मामले पर सुनवाई करेगी।
कोर्ट ने वकील बत्रा की याचिका पर कार्यवाही बंद कर दी, क्योंकि उन्होंने कहा कि ऑनलाइन गेमिंग नियमों की मांग करने वाली उनकी याचिका पर आगे आदेश की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने बत्रा को किसी भी शिकायत के मामले में फिर से अदालत का रुख करने की स्वतंत्रता दी।
बत्रा ने अपनी याचिका में कहा था कि ऑनलाइन गेम्स को स्क्लि के गेम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है और ऑनलाइन गैम्बलिंग (जुआ) किसी भी नशीले पदार्थ की लत जितना ही बुरा है।
यह भी दावा किया गया था कि यदि ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी को विनियमित नहीं किया जाता है, तो इससे बड़े पैमाने पर समाज को भारी नुकसान होने की संभावना है, युवा ऐसे खेलों का शिकार हो सकते हैं, जो उनके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेंगे।