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Supreme Court: 'मौजूदा स्थिति में हमें उनका मनोबल नहीं गिराना चाहिए', महिला सैन्य अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट

Fri, 09 May 2025 02:09 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश की सर्वोच्च अदालत ने  केंद्र से कहा कि वह शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला सैन्य अधिकारियों को सेवा से मुक्त न करे। बता दें कि, 2020 के फैसले के बाद से, शीर्ष अदालत ने सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन के मुद्दे पर कई आदेश पारित किए हैं और इसी तरह के आदेश नौसेना, भारतीय वायु सेना और तटरक्षक बल के मामले में पारित किए गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से कहा कि वह शॉर्ट सर्विस कमीशन की महिला सैन्य अधिकारियों को सेवा से मुक्त न करे, जिन्होंने उन्हें स्थायी कमीशन देने से इनकार करने के फैसले को चुनौती दी है। न्यायालय ने कहा कि मौजूदा स्थिति में उनका मनोबल न गिराया जाए। मामले में जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने 69 सैन्य अधिकारियों की तरफ से दायर याचिकाओं को अगस्त में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और कहा कि अगली सुनवाई तक उन्हें रिहा नहीं किया जाना चाहिए।
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जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी
इस दौरान जस्टिस कांत ने कहा 'मौजूदा स्थिति में, आइए उनका मनोबल न गिराएं। वे शानदार अधिकारी हैं, आप उनकी सेवाओं का उपयोग कहीं और कर सकते हैं। यह वह समय नहीं है जब उन्हें सुप्रीम कोर्ट में घूमने के लिए कहा जाए। उनके पास रहने और देश की सेवा करने के लिए बेहतर जगह है'। वहीं केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि यह सशस्त्र बलों को युवा बनाए रखने की नीति पर आधारित एक प्रशासनिक निर्णय था।
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'भारतीय सेना को युवा अधिकारियों की जरूरत'
उन्होंने शीर्ष अदालत से उनकी रिहाई पर कोई रोक न लगाने का आग्रह किया और कहा कि भारतीय सेना को युवा अधिकारियों की जरूरत है और हर साल केवल 250 कर्मियों को स्थायी कमीशन दिया जाता है। कर्नल गीता शर्मा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कर्नल सोफिया कुरैशी के मामले का हवाला दिया, जो उन दो महिला अधिकारियों में से एक हैं जिन्होंने 7 और 8 मई को ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया को जानकारी दी थी। गुरुस्वामी ने कहा कि कर्नल कुरैशी को स्थायी कमीशन से संबंधित इसी तरह की राहत के लिए इस अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था और अब उन्होंने देश को गौरवान्वित किया है।

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'महिलाओं को पूरी तरह से बाहर रखा जाना अक्षम्य'
पीठ ने दलील पर ज्यादा टिप्पणी किए बिना कहा कि शीर्ष अदालत के समक्ष मामला पूरी तरह से कानूनी है, इसका अधिकारियों की उपलब्धियों से कोई लेना-देना नहीं है। 17 फरवरी, 2020 को शीर्ष अदालत ने कहा कि सेना में स्टाफ असाइनमेंट को छोड़कर सभी पदों से महिलाओं को पूरी तरह से बाहर रखा जाना अक्षम्य है और बिना किसी औचित्य के कमांड नियुक्तियों के लिए उन पर पूरी तरह से विचार न करना कानून में कायम नहीं रह सकता। 

सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन (पीसी) की अनुमति देने वाली शीर्ष अदालत ने कहा कि महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों को स्टाफ नियुक्तियों के अलावा कुछ भी प्राप्त करने पर पूर्ण प्रतिबंध स्पष्ट रूप से सेना में करियर में उन्नति के साधन के रूप में पीसी प्रदान करने के उद्देश्य को पूरा नहीं करता है। शीर्ष अदालत ने महिला अधिकारियों की तरफ से हासिल की गई उपलब्धियों का भी उल्लेख किया और कर्नल कुरैशी की उपलब्धियों का उदाहरण दिया।

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