बीते तीन वर्षों में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की कुल 4,799 घटनाएं हुईं जिनमें 17 प्रदर्शनकारी और दो सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बुधवार को यह जानकारी दी।
एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने बताया कि साल 2015 में पत्थरबाजी की 730, साल 2016 में 2,808 और साल 2017 में 1,261 घटनाएं दर्ज की गईं।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पैलेट गन का संभावित विकल्प तलाशने को लेकर 26 जुलाई, 2016 को एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति की सिफारिशों के कार्यान्वयन पर सरकार द्वारा ध्यान दिया गया है।
बता दें कि पत्थरबाजी के जवाब में सेना ने जब पैलेट गन से वार करना शुरू किया था तो जम्मू कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं और बढ़ गई थीं। यहां तक की सरकार को इसके लिए जवाब देना तक मुश्किल हो गया था।
आठ अक्तूबर को फिर खबर आई थी कि कश्मीर में पैलेट गन नहीं, बल्कि पत्थरबाजों पर घाव नहीं करने वाली प्लास्टिक की बुलेट चलाई जाएंगी। इसके लिए 21 हजार प्लास्टिक की बुलेट की खेप कश्मीर भेजी भी गईं थीं। पत्थरबाजों पर कश्मीर में पैलेट गन चलाए जाने पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे थे। बताया गया था कि प्लास्टिक की बुलेट पैलेट से कम घातक हैं और इन्हें एके 47 आदि असलहे से भी चलाया जा सकता है।