केरल, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बाद कर्नाटक में सबसे ज्यादा तलाक के मामले अदालत की दहलीज तक पहुंचते हैं। कर्नाटक में 2014 में 16,690 जोड़ो ने तलाक लिया था। 2015 की शुरुआत में यहां की परिवार अदालतों में 23,285 मामले लटके पड़े थे।
परिवार अदालत में वकालत करने वाले बीएन नागराज के मुताबिक वो रोज करीब 25 तलाक के मामलों में वादी की ओर से कोर्ट में प्रस्तुत होते हैं। उनका कहना है कि न्यायाधीश एक मामले पर 6 मिनट से ज्यादा नहीं दे पाते क्योंकि उससे मामलों का बोझ बढ़ जाता है।
अधिकतर मामलो में यह देखा गया है कि दोनों के आपसी रिश्ते कुछ ही दिनों में दरकने लगते हैं। इतना ही नहीं मैंने यह भी देखा है कि लोगों की दूसरी शादी भी टूट रही है।
उन्होंने बताया कि दुराचार और नपुंसकता के बाद तलाक का जो सबसे बड़ा कारण वादियों ने बताया वो समलैंकिता है। इस संबंध में वकील ऋषि के रुइया के मुताबिक तलाक के बढ़ते हुए मामले यह साबित कर रहे हैं कि महिलाएं व्यर्थ के कारणों के चलते रिश्ते नहीं निभाना चाहती।
आंकड़ों के मुताबिक सन् 2007 से 2015 के बीच बेंगलुरु मेंडिटेशन सेंटर में वैवाहिक विवादों के 27,711 मामलों को निपटाया गया, जिसमें से 20,307 मामले सुलझाए गए। मेडिटेशन सेंटर के निदेशक चंद्रशेखर रेड्डी के अनुसार इस साल जनवरी से 18 जून के बीच 104 दंपतियों के बीच सुलह करई गई। 2015 के 114 मामलों में दंपतियों में सुलह कराई गई।
Published By Rahul Sankrityayan