पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (फाइल फोटो)
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक में भाग लेने से इनकार कर दिया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या नीति आयोग में 'दीदी' अलग-थलग पड़ गई हैं। कई मुख्यमंत्री, जो पिछले साल हुई आयोग की बैठक में दीदी के साथ चल रहे थे, वे अब दूर हो रहे हैं। पिछले साल नीति आयोग की बैठक में गैर-भाजपाई मुख्यमंत्रियों द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी के भाषण का बहिष्कार करने की कथित योजना सिरे नहीं चढ़ पाई थी।
बताया जाता है कि आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस योजना का प्रारूप तैयार किया था। इस बार भी जब दीदी ने यह कहा कि वे 15 जून की बैठक में भाग नहीं लेंगी तो दूसरे किसी भी गैर-भाजपाई मुख्यमंत्री ने उनका समर्थन नहीं किया। यहां तक कि केरल के सीएम पी. विजयन और कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी ने बैठक के विरोध में एक शब्द तक नहीं कहा। पिछले साल 17 जून 2018 को नीति आयोग की चौथी बैठक बुलाई गई थी। इसमें दीदी आईं, मगर बीच में ही उठकर चली गईं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को परेशान किया जा रहा है। इस बैठक में 23 राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे थे। एक राज्य के उपराज्यपाल ने भी शिरकत की। उत्तर-पूर्व के राज्यों के कई मुख्यमंत्री बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर बैठक में नहीं आ सके थे।
बता दें कि आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को घेरने के मकसद से एक खास योजना बनाई थी। इस बाबत गैर-भाजपाई मुख्यमंत्रियों से संपर्क भी किया गया। कांग्रेस पार्टी ने मोदी के भाषण का बहिष्कार करने की योजना का समर्थन नहीं किया। इसके अलावा कई दूसरे सीएम भी कुछ साफ नहीं बोल सके। किसी ने कहा कि अंतिम समय पर निर्णय लेंगे तो किसी ने कोई और शर्त रख दी। इस बार आंध्र प्रदेश की सत्ता चंद्रबाबू नायडू के हाथ से निकलकर जगनमोहन रेड्डी के हाथ में आ गई है। जगनमोहन रेड्डी पहले ही कह चुके हैं कि वह नीति आयोग की बैठक में भाग लेंगे। मुख्यमंत्री बनने के बाद वह पीएम मोदी और अमित शाह से मिल चुके हैं। उन्होंने इशारा कर दिया है कि वह मोदी के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। केरल के सीएम पी. विजयन और कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
इस बार भी ममता के साथ एक भी सीएम नहीं...
पिछली बार दीदी ने अरविंद केजरीवाल के मसले पर नीति आयोग की बैठक का बीच में ही बायकॉट कर दिया था। इस बार केजरीवाल भी उनके साथ नहीं हैं। कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि उनके मुख्यमंत्री नीति आयोग की बैठक में जाएंगे। पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह ने बाकायदा कांग्रेस पार्टी के चार मुख्यमंत्रियों के साथ नीति आयोग की बैठक के एजेंडे पर एआईसीसी में चर्चा की है। चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी के करीबियों का कहना है कि इस बार भी उनकी रणनीति कामयाब नहीं हो सकी। गैर-भाजपाई मुख्यमंत्रियों में से किसी ने भी मोदी के खिलाफ दीदी की मुहिम का हिस्सा बनने के लिए कदम आगे नहीं बढ़ाया। चुनाव से पहले 21 दलों के जो नेता कोलकाता रैली में दीदी के मंच पर मौजूद थे, आज वे भी मौन हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा और टीएमसी के बीच शुरू हुई टकराहट में दीदी के सहयोगी रहे मुख्यमंत्री आज बयान तक जारी नहीं कर रहे हैं।
दूसरी ओर, नीति आयोग की पांचवीं बैठक को दीदी ने एक बेकार की कवायद बता दिया है। पीएम मोदी को लिखे अपने पत्र में ममता बनर्जी ने कहा, नीति आयोग के पास न तो कोई वित्तीय अधिकार है और न ही राज्यों की योजनाओं का समर्थन करने की शक्ति। इससे पहले भी वे आयोग की तीन बैठकों में नहीं आई थीं।