बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से सभी नॉन एंबियेंट (प्रदूषित) शहरों को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) में शामिल करने और देशभर में निगरानी केंद्र बढ़ाने का अनुरोध किया है। नॉन एंबियेंट शहर राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं।
जावड़ेकर को लिखे पत्र में आईएमए ने कहा, स्वच्छ वायु लोगों के स्वस्थ जीवन की अहम जरूरत है। वैश्विक स्तर पर वायु प्रदूषण असमय मौत का पांचवां कारण है। भारत में वायु प्रदूषण से मौतों के आंकड़े में धूम्रपान से होने वाली मौतों की तुलना में मामूली अंतर है।
वायु प्रदूषण अब पर्यावरणीय मुद्दा न होकर स्वास्थ्य व आर्थिक संकट बन चुका है। दिल्ली में स्थिति चेताने वाली है, जहां जनवरी से दिसंबर 2018 के बीच पीएम 10 स्तर 225 तक पहुंच गया है, जो तय वार्षिक मानक 60 से कहीं ज्यादा है।
कई अध्ययन बताते हैं कि प्रदूषण घटाने को लेकर तत्काल सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। लिहाजा हम मंत्रालय से अनुरोध करते हैं कि वह हमारे सुझावों को स्वीकार करें और निगरानी केंद्र बढ़ाने के साथ ही नॉन एंबियेंट शहरों को एनसीएपी में शामिल करे।