एआई आधारित उपकरण विकसित करने वाले चारों इंजीनियर दोस्त
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इंटरनेट युग में सबसे तेजी से अगर कुछ बदलाव आ रहा है तो उसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी एआई है। इस बीच इंजीयरिंग के चार दोस्तों ने एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित उपकरण बनाने का दावा किया है जो ऊंचे स्थानों से कूदने वाले जंपर्स के डेटा को ट्रैक कर उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकेगा। यानि आने वाले समय में साहसिक खेलों और साहसिक पर्यटन उद्योग को सुरक्षित बनाने की दिशा में इस उपकरण का इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही उच्च तकनीकी कैमरों, सीसीटीवी और अन्य महंगे उपकरणों की जरूरत भी खत्म हो जाएगी। इस डिवाइस को विकसित करने में आईआईटी मंडी के स्टार्टअफ का भी सपोर्ट था।
इसके तहत एआई की मदद से प्रतिभागी के प्रदर्शन के डेटा पॉइंट्स को ट्रैक कर लिया जाएगा, उसके आधार पर जंपिंग की अनुमति प्रदान करेगा। अगर कुछ गलत प्रतीत होगा या जंपिंग के प्रोटोकाल या अंतरराष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन होता प्रतीत होगा तो ये तकनीक जंप की अनुमति प्रदान नहीं करेगी। यह तकनीक ऊंचे स्थानों से छलांग लगाने वाले खेलों में 100 से अधिक जंपिंग स्टाइल सुरक्षा प्रदान करेगा। इसका अपने आप में इस प्रकार के दुनिया के पहले डिवाइस होने का दावा किया जा रहा है।
उपकरण विकसित करने वाले चारों युवक हैं पर्वतारोही
ये चारों दोस्त इंजीनियर होने के साथ चट्टानों और पर्वतों पर चढ़ाई करने में प्रमाणिक रूप से दक्ष हैं। इन्होंने अपने मनालीस्विंग नामक स्टार्ट अप का मानवीय परीक्षण पूरा कर लिया है और इसकी अवधारणा और डिजाइन का पेटेंट हासिल करने की प्रक्रिया कर रहे हैं। टीम अगले साल की शुरुआत में मनाली में स्विंग लॉन्च करेगी। इसका अनुभव लेने के लिए पर्यटक को 3000 रुपये चुकाने होंगे। टीम का दावा है कि स्विंग लॉन्च को लेकर दुबई सरकार ने इनसे संपर्क किया है और ये स्विट्जरलैंड की इच्छुक एजेंसियों के साथ बातचीत भी कर रहे हैं।
डमी जंप के बाद मानव ट्रायल भी सफलतापूर्वक पूरा
टीम सदस्यों में से एक उत्सव सोनी ने कहा, फ्री फाल वाली बंजी जंपिंग में सुरक्षा के लिए लगी रबर की रस्सी में सेट किए गए एआई आधारित प्रतिभागी के वाइटल्स का अध्ययन करते रहेंगे। स्टार्ट अप ने आईआईटी हैदराबाद के आईआरटीए विशेषज्ञों की विशेष उपस्थिति में 1,000 डमी जंप का और उसके बाद मानव जंप का ट्रायल सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है।