केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में 'सीएसएस' के तहत कार्यरत असिस्टेंट सेक्शन अफसरों के लिए एक माह का ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया गया है। अगर कोई अधिकारी इस ट्रेनिंग से दूर भागता है, तो उसे पदोन्नति नहीं मिलेगी। साथ ही कोई ऐसा अधिकारी, जो शुरू में यह ट्रेनिंग ज्वाइन कर लेता है और बीच में छोड़कर चला जाता है, तो सरकार उससे पूरा खर्च वसूलेगी।
हालांकि सरकार ने कुछ नियम बनाए हैं, जिसके आधार पर किसी अधिकारी को ट्रेनिंग से छूट दी जा सकती है। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इस बार ये ट्रेनिंग ऑनलाइन रहेगी। इसके लिए किसी अधिकारी को 'सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान' में जाने की जरूरत नहीं है।
वह अपने मोबाइल फोन या लेपटॉप से इस ट्रेनिंग में हिस्सा ले सकता है। ट्रेनिंग के अंक संबंधित अधिकारी की एपीएआर (एनुअल परफॉर्मेंस अप्रेजल सिस्टम) में जोड़े जाएंगे।
यह ट्रेनिंग 20 जुलाई से शुरू होगी और 21 अगस्त तक चलेगी। ट्रेनिंग का सिलेबस एवं शेड्यूल 'सचिवालय प्रशिक्षण और प्रबंधन संस्थान' ने तैयार किया है। डीओपीटी के नियम जीएसआर 483 ई के तहत ये ट्रेनिंग सभी के लिए जरूरी है। ट्रेनिंग पूरी करने वाले अधिकारियों को प्रमोशन में प्राथमिकता मिलती है।
किसी अधिकारी को किन परिस्थितियों में इस ट्रेनिंग से छूट मिलेगी, यह सब नियमों में लिखा गया है। मंत्रालय या विभाग अपनी मनमर्जी से किसी अधिकारी को इस ट्रेनिंग से छूट नहीं दे सकते। यदि कोई अधिकारी जानबूझ कर इस ट्रेनिंग में शामिल नहीं होता है, तो उसका प्रमोशन एवं दूसरे फायदे रोके जा सकते हैं।
अनिवार्य कैडर प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत यदि कोई अधिकारी पहले मौके में यह ट्रेनिंग नहीं कर पाता है, तो उसे दूसरा मौका देने का फैसला डीओपीटी करती है। ट्रेनिंग स्थगन के दौरान संबंधित अधिकारी को प्रमोशन नहीं मिलेगा। उसके ग्रेड में भी कोई बदलाव नहीं होगा।
अगर कोई अफसर स्टड्डी टूर पर देश या विदेश में है और उसका खर्च डीओपीटी उठा रही है, अगर उसे खुद कोई मेडिकल जरूरत है, परिवार में कोई सदस्य बीमार है, मैटरनिटी या पैटरनिटी लीव पर है, खुद के बच्चे की शादी है, चुनावी ड्यूटी पर है या ड्यूटी के चलते विदेश में है तो उसे ट्रेनिंग से छूट दी जा सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में अधिकारी को दोबारा से ट्रेनिंग का मौका दिया जाएगा। यदि कोई अधिकारी बिना किसी ठोस मेडिकल ग्राउंड के बीच में ट्रेनिंग छोड़ देता है तो उससे वसूली करने का प्रावधान है।