एक साथ
तीन तलाक को गैरजमानती अपराध बनाने संबंधी बिल
लोकसभा में पारित कराने के बाद भाजपा सियासी मोर्चे पर निश्चिंत है। नरम हिंदुत्व की राह पर चल रही कांग्रेस में बनी असमंजस की स्थिति के बीच पार्टी राज्यसभा में इस बिल को पारित कराने को ले कर ज्यादा माथापच्ची नहीं कर रही। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि बिल के राज्यसभा में लटकने या पारित होने जैसी दोनों स्थितियों में भाजपा सियासी फायदे में रहेगी। बिल पारित न होने की स्थिति में पार्टी विपक्ष पर एक बड़े सुधार की राह में रोड़ा अटकाने का आरोप लगाएगी तो पारित होने पर कानून बनाने का उसे स्वाभाविक श्रेय मिलेगा।
कांग्रेस की इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्तियां तो है, मगर वह इस पर स्पष्ट राजनीतिक लाइन तय नहीं कर पा रही। सीधे बिल के विरोध में उतरने पर उसके नरम हिंदुत्व की छवि पर उल्टा असर पड़ेगा, जबकि चुप्पी साधने पर सुधार का सारा श्रेय भाजपा ले जाएगी। फिलहाल पार्टी में एक साथ तीन तलाक को गैरजमानती के बदले जमानती अपराध बनाने की मांग करने पर मंथन हो रहा है। पार्टी चाहती है कि इस बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाय। ऐसे में उसे अपनी रणनीति पर सोचने के लिए समय मिलेगा।
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