अदालत में मामला विचाराधीन होने पर अब कुलपति और डायरेक्टर पद की रेस में आवेदन नहीं कर पाएंगे। विश्वविद्यालयों में कुलपति और आईआईटी व एनआईटी में डायरेक्टर पद की रेस में विजिलेंस क्लीयरेंस के बाद भी उम्मीदवारों की योग्यता पर सवाल उठने के चलते सरकार नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है। इसके तहत विजिलेंस क्लीयरेंस में लिखा जाएगा कि उम्मीदवार के खिलाफ कोई मामला अदालत में लंबित नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक, विश्वविद्यालयों के कुलपति की नियुक्ति मामले में सबसे अधिक दिक्कतें आ रही हैं। विजिलेंस क्लीयरेंस के आधार पर सर्च एंड सलेक्शन कमेटी योग्यता पूरी होने पर उम्मीदवार का नाम पैनल के लिए चयनित करती है। कमेटी द्वारा चयनित होने के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय संबंधित उम्मीदवारों के नामों का पैनल विश्वविद्यालयों व संस्थानों के विजिटर यानी राष्ट्रपति के पास भेज देता है।
क्योंकि कुलपति और डायरेक्टर पद में नाम फाइनल करने का अधिकार विजिटर के पास है। हालांकि कई बार पैनल विजिटर के पास पहुंचने के बाद शिकायत आती हैं कि संबंधित उम्मीदवार पर भ्रष्टाचार के घोटाले में नाम शामिल है। पिछले दिनों इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक का पैनल राष्ट्रपति को भेजा।
इसी बीच शिकायतकर्ता पैनल में शामिल एक उम्मीदवार पर भ्रष्टाचार घोटाले में शामिल होने की शिकायत दी। ऐसे मामलों से बचने के लिए ही कुलपति और डायरेक्टर पद की रेस में अदालत में मामला लंबित होने पर ऐसे उम्मीदवारों को शामिल न करने की तैयारी चल रही है। कुछ महीने पहले विजिटर ने मंत्रालय को किसी भी पैनल का फाइनल करने से पहले उनकी विजिलेंस क्लीयरेंस अच्छे से जांचने की हिदायत दे रखी है।