सूर्य अनुमान से कहीं ज्यादा बार साैर सुपरफ्लेयर उत्पन्न कर सकता है, जो सामान्य से कहीं अधिक शक्तिशाली होते हैं और इनसे लाखों गुना अधिक ऊर्जा निकलती है। इनके पृथ्वी से टकराने पर गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इससे दुनियाभर में तकनीकी तबाही यानी संचार प्रणाली, पावर ग्रिड और उपग्रह तक नष्ट हो सकते हैं। एक तरह से ये धरती के लिए विनाशकारी हो सकते हैं।
जापानी खगोलविदों के अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इसके निष्कर्ष साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। खगोलविदों ने 12 प्रकाशवर्ष दूर स्थित एक तारे से भयंकर ज्वाला निकलते देखी है, जिसे उन्होंने सुपरफ्लेयर नाम दिया है। इस तरह के एक नहीं कई आग उतरते तारे हैं। हालांकि सुपरफ्लेयर को दुर्लभ घटनाएं माना जाता था, लेकिन इस नए अध्ययन से पता चलता है कि वे अनुमान से कहीं अधिक बार हो सकते हैं।
विद्युत चुम्बकीय विकिरण के शक्तिशाली विस्फोट
सौर सुपरफ्लेयर्स विद्युत चुम्बकीय विकिरण के शक्तिशाली विस्फोट हैं जो सूर्य जैसे अन्य तारों की सतह से भी निकलते हैं। थोड़े समय के भीतर इसमें बहुत ज्यादा ऊर्जा का उत्सर्जन होता है। ये प्रकाश की गति से यात्रा कर कुछ ही मिनटों में पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल और आयन मंडल (आईओनोस्फीयर) को प्रभावित कर सकता है। इसे थर्मोस्फीयर के नाम से भी जाना जाता है। पृथ्वी की यह परत ब्रह्मांडीय और सौर विकिरण द्वारा संचालित है।
छोटे सौर फ्लेयर्स पृथ्वी पर संचार ब्लैकआउट के लिए जिम्मेदार
छोटे सौर फ्लेयर्स भी पृथ्वी पर संचार ब्लैकआउट के लिए जिम्मेदार होते हैं। 1859 में कैरिंगटन घटना अब तक दर्ज किए गए सबसे शक्तिशाली सौर तूफानों में से एक थी। उस समय यूरोप और उत्तरी अमेरिका में टेलीग्राफ सिस्टम अस्थायी रूप से बंद हो गए थे।
एक नजर अध्ययन पर
अध्ययन के अनुसार अगर कोई सौरफ्लेयर धरती से टकराता है तो बहुत ज्यादा वित्तीय नुकसान हो सकता है। दूरसंचार में बाधा आने से यह पूरे शेयर बाजार और आर्थिक आधार को रोक सकता है। आधुनिक दुनिया भी इस समस्या के समाधान के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वैज्ञानिकों को ही ठीक से पता नहीं है कि सुपरफ्लेयर कब धरती से टकरा सकता है।