राजग की ओर से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का मानना है कि यदि देश के राष्ट्रपति की आलोचना हो सकती है तो न्यायपालिका की कार्यशैली पर अंगुली क्यों नहीं उठाई जा सकती। तत्कालीन राज्यसभा सदस्य कोविंद ने यह बात अदालत अवमानना (संशोधन) विधेयक, 2006 पर बहस के दौरान कही थी।
तत्कालीन कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने 3 मार्च 2006 को राज्यसभा में यह विधेयक पेश किया था। इस पर बहस के दौरान कोविंद ने कहा था, ‘जजों की नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति के हाथों में ही होता है और राष्ट्रपति भी आलोचना के शिकार होते हैं तो फिर जज क्यों नहीं। इस देश का कोई भी नागरिक राष्ट्रपति के गलत कार्यों की आलोचना कर सकता है।
आलोचना के इस दायरे से जब तक न्यायपालिका को बाहर रखा जाता है तब तक मुझे यह जायज नहीं लगता।’ हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि न्यायपालिका को स्वतंत्र संस्था बनाए रखने के लिए इस दायरे से बाहर रखा गया है।