भारत ने पाकिस्तान के साथ सैन्य डिप्लोमेसी में बदलाव का संकेत देते हुए उसे बड़ा कूटनीतिक संदेश दिया है। पूर्व विदेश सचिव शशांक इसे काफी अच्छा कदम बता रहे हैं। शशांक का कहना है कि भारत ने यह कदम यूं ही नहीं उठाया है। इसके जरिए भारत ने जहां पाकिस्तान को सीधे शब्दों में बताने की कोशिश की है कि वह आतंकवाद को सहन नहीं करेगा और ऐसा होने पर सीमापार कार्रवाई से नहीं हिचकेगा, वहीं उसे साफ संकेत दे दिया है कि हाल-फिलहाल दोनों देशों के बीच में बातचीत की गुंजाइश कोई नहीं है।
पूर्व विदेश सचिव ने सेना मुख्यालय के मेजर जनरल अशोक नेरुला के वक्तव्य को काफी अहम मानते हुए कहा कि ऐसा दूसरी बार हुआ है जब साल भर के भीतर दूसरी बार सेना ने न सिर्फ सीमित सैन्य कार्रवाई को अधिकारिक रूप दिया, बल्कि इसके पीछे पाकिस्तान की सेना द्वारा आतंकियों को पनाह देना, उन्हें सीमा पार कराना प्रमुख वजह बताया।
इसे पहले जब सेना ने पिछले साल सर्जिकल स्ट्राइक को अधिकारिक रूप दिया था, तब भी आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही थी। शशांक के अनुसार यह पूरी दुनिया के लिए संदेश है कि पाकिस्तान में आतंकवाद को पनाह मिल रही है और भारत ने आतंकवादियों के विरुद्ध कदम उठाया है। इस तरह से आतंकवाद के मोचे पर ज्यादा भारत मुखर हुआ है।
सही समय पर सही निर्णय
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भारत ने नौशेरा में नियंत्रण रेखा के उसपार गोलाबारी का निर्णय सही समय पर लिया है। राजनयिकों का मानना है कि यह कदम आतंकवाद के खिलाफ बन रहे माहौल को ध्यान में रखकर लिया है। इसके पीछे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वक्तव्य को अहम माना जा रहा है।
ट्रंप ने हाल में ही कुछ देशों पर आतंकवादियों को सह देने आरोप लगाते हुए उन्हें बाज आने की हिदायत दी थी। दूसरा बड़ा घटनाक्रम में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भेंट न हो पाना भी है। जबकि शिखर नेताओं की भेंट के लिए पाकिस्तान के अधिकारियों तथा सऊदी अरब ने भी प्रयास किया था। माना जा रहा है कि अमेरिका के इस रूख को भांपकर ही भारत ने पाकिस्तान को यह संदेश दिया है।
राजनयिकों के अनुसार अगले सप्ताह प्रधानमंत्री रूस, जर्मनी, स्पेन के लिए रवाना हो रहे हैं। इसके बाद वह संघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेंगे। समझा जा रहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी वहां होंगे। ऐसे में सेना की कार्रवाई और उसकी अधिकारिक घोषणा को काफी अहम माना जा रहा है।
जरूरी थी सैन्य कार्रवाई
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शशांक के अलावा पूर्व विदेश सचिव सलमान हैदर का भी मानना है कि नौशेरा से पाक अधिकृत कश्मीर में सेना की संक्षिप्त कार्रवाई जरूरी थी। कूटनीति के जानकारों के अनुसार पाकिस्तान के रक्षा मंत्री समेत अन्य लगातार भारत को नजर अंदाज कर रहे थे। वह समय समय पर परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी देते आए हैं। ऐसे में भारत ने आक्रामक रुख अपनाकर बता दिया कि वह पाकिस्तान के अधिकारियों, नेताओं की धमकी की परवाह नहीं करता।
पहले होती रही है ऐसी कार्रवाई
सेना मुख्यालय सूत्रों के अनुसार सीमापार हैवी फायर की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। सैन्य सूत्रों का कहना है कि पहले भी सीमापार की फायरिंग में सेना जवाबी कार्रवाई में बंकर आदि निशाना बनाए जाते थे। पाकिस्तान की सेना भी ऐसा करती थी, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक और पिछले दिनों हुई फायरिंग को सेना ने अधिकारिक रूप से स्वीकार किया है। इसे सैन्य नीति में एक बदलाव के तैर पर भी देखा जा रहा है।