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बहुमत न मिला तो... क्षेत्रीय दलों से लेकर भाजपा तक ढूंढ़ रहे विकल्प

Thu, 23 May 2019 05:52 AM IST
गौरव द्विवेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019 - फोटो : Amar Ujala
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एक अनुमान यह लगाया जा रहा है कि भाजपा को उत्तर प्रदेश समेत 6 हिंदी भाषी राज्यों में 50-60 से ज्यादा सीटों का नुकसान हो सकता है। उसकी सीटों की संख्या 200 के आसपास या इससे कम भी रह सकती है। हालांकि भाजपा इसकी भरपाई ओडिशा, पश्चिम बंगाल व पूर्वोत्तर से करने का दावा कर रही है। वहीं, पार्टी यूपी में भी 50 के करीब सीटें लाने का दावा कर रही है। इसके बावजूद भाजपा की गिनती नहीं सुधरी तो सरकार बनाने के लिए उसे एनडीए व उसके बाहर के दलों पर निर्भर होना पड़ेगा, उनकी शर्तों पर समझौता करना पड़ेगा। सबसे बड़े दल और सबसे बड़े गठबंधन के नाते भाजपा को सरकार बनाने का मौका मिल भी जाए तो उसे बहुमत साबित करने के लिए क्षेत्रीय दलों को साधना पड़ेगा। तेलंगाना राष्ट्र समिति, वाईएसआर कांग्रेस और बीजू जनता दल को साथ लाने के लिए उनकी शर्तों को मानना पड़ेगा। अपने सहयोगियों को साधे रखने में भी मशक्कत करनी पड़ेगी। कांग्रेस समेत गैर कांग्रेसी विपक्षी दलों की एकता से उसकी कोशिशों को झटका भी लग सकता है।
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225 तक सीटें मिलीं तो अपनी शर्तों पर होगी बात
एक स्थिति यह भी हो सकती है कि भाजपा को 225 के आसपास सीट मिलें और एनडीए बहुमत के नजदीक पहुंच जाए। ऐसे हालात में भाजपा को एनडीए के सहयोगियों को एकजुट रखने और दूसरे क्षेत्रीय दलों को जोड़ने में आसानी होगी। उनसे अपनी शर्तों पर बात होगी। एनडीए की सहयोगी शिवसेना, जनता दल (यू), शिरोमणि अकाली दल व तमिलनाडु की एआईएडीएमके जैसे क्षेत्रीय प्रभाव वाले दलों के साथ नए सहयोगियों से सियासी मोलभाव के लिए भाजपा की हैसियत बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में बीजद, वाईएसआर कांग्रेस, टीआरएस जैसे दल भाजपा के नए दोस्त हो सकते हैं।

कांग्रेस की अगुवाई में यूपीए-3 सरकार
भाजपा की कम सीटें आने की स्थिति में एक संभावना कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए सरकार बनने की बनती है। लेकिन, यह तभी संभव होगा जब कांग्रेस अपने बूते कम से कम 130-140 सीटें हासिल करने में सफल रहे। हालांकि, 44 से 140 सीटों तक पहुंचने की कांग्रेस की राह आसान नहीं लगती। ऐसा हो भी जाए तो कांग्रेस डीएमके, राजद, एनसीपी जैसे पुराने सहयोगियों के साथ ही वाईएसआर कांग्रेस व कुछ अन्य दलों को साथ लेकर सरकार बनाने की कोशिश कर सकती है। ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती उसी स्थिति में कांग्रेस के साथ जा सकते हैं, जब मोदी को रोकने के लिए कोई और विकल्प न बचा हो।
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दोनों राष्ट्रीय दल चूके तो गैर भाजपा-गैर कांग्रेस सरकार
भाजपा के बहुमत से चूकने और कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर एक विकल्प गैर भाजपा-गैर कांग्रेस सरकार के गठन का है। यह स्थिति तभी आएगी जब दोनों राष्ट्रीय पार्टियां सम्मानजनक जीत हासिल करने से चूक जाएं और क्षेत्रीय दल मजबूत होकर उभरें। भाजपा को रोकने के   नाम पर कांग्रेस इस गठबंधन को समर्थन दे सकती है। पूर्व में   वीपी सिंह, चंद्रशेखर, एचडी देवगौड़ा, आईके गुजराल जैसे नेताओं ने इसी समीकरण से सरकार बनाई थी। हालांकि, उनकी सरकारों की उम्र लंबी नहीं रही।
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