मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
बिहार में मतदाताओं ने किसकी किस्मत में सरकार चलाने का फैसला लिखा है, और कौन विपक्ष में बैठेगा, यह तस्वीर शुक्रवार दोपहर तक करीब-करीब साफ हो जाएगी। सत्ता के दोनों प्रबल दावेदार गठबंधनों में चाहे जो भी जीते, लेकिन यह तय है कि इस बार बिहार की नई सरकार में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। यदि एनडीए को बहुमत मिलता है तो नई सरकार अपने मंत्रिमंडल के माध्यम से '2027 के विकसित बिहार' का खाका खींचने की कोशिश करेगी। वहीं, यदि महागठबंधन चुनाव जीतता है तो तेजस्वी यादव के सामने खुद को नीतीश से बेहतर विकास करने वाले नेता के रूप में स्थापित करने की चुनौती होगी। 'हर घर को एक सरकारी नौकरी' देने के अविश्वसनीय वादे से वे कैसे निपटते हैं, इस पर बिहार के हर आदमी की नजर होगी।
यदि नीतीश कुमार सरकार की वापसी होती है तो नए मंत्रिमंडल में उच्च जातियों का प्रतिनिधित्व पहले की तुलना में बढ़ सकता है। एनडीए ने अपने सबसे भरोसेमंद वोट बैंक को ईनाम देने की रणनीति अपनाई और चुनाव बाद यह मंत्रिमंडल विस्तार में भी दिखाई दे सकती है। साथ में बिहार के सभी जातियों-वर्गों को मंत्रिमंडल में जगह देकर सभी सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जा सकती है।
निवेश बनेगा मूलमंत्र
भाजपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त है। पिछली सरकार में विकास के जो कार्य शुरू किए गए थे, इस बार उसे और अधिक तेजी से पूरा करने की कोशिश की जाएगी। बिहार की अब तक की सबसे बड़ी बाधा औद्योगिक निवेश में ठहराव और नौकरियों के सृजन में भारी कमी रही है। लेकिन इस बार बिहार के हर जिले में नई औद्योगिक इकाइयां लगाकर, सड़क-मूलभूत ढांचे का विकास कर और हर जिले के किसी कृषि उत्पाद को प्रसंस्कृत कर उसके माध्यम से किसानों को मजबूत बनाने की कोशिश रहेगी। इससे लोगों को रोजगार देने के साथ-साथ 2047 में विकसित बिहार बनाने का रास्ता तैयार हो सकता है।
महिलाओं को मिलेगा ईनाम
एक नेता के अनुसार, सरकार की वापसी में सबसे बड़ी भूमिका महिला मतदाताओं की हो सकती है। जीविका दीदी योजना नीतीश सरकार को सत्ता में वापसी का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। यदि अपेक्षित परिणाम आए तो महिलाओं की रोजगार आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाई दी जा सकती है। इससे बिहार के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाने के साथ-साथ नौकरी के मोर्चे पर निपटने में मदद मिलेगी। सरकार में महिला मंत्रियों की संख्या बढ़ाने का काम भी किया जा सकता है।
नेताओं के सरकार बनाने के दावे, लेकिन बोलने में सभी सतर्क
सभी एग्जिट पोल ने एक स्वर में एक बार फिर बिहार में नीतीश कुमार सरकार की वापसी की संभावना जताई है। लेकिन छः एग्जिट पोल ने महागठबंधन के सीटों की संख्या सौ या उसके पार जाने की भी संभावना जताई है। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में बहुमत के जादुई आंकड़े के लिए केवल 122 की ही संख्या पर्याप्त होती है। ऐसे में आधे वोट प्रतिशत के भी अंतर से अंतिम परिणाम में बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि दोनों गठबंधनों के सरकार बनाने के दावों के बीच चुनाव विशेषज्ञ बहुत संभलकर बात कर रहे हैं।