परिसीमन से जुड़े महिला आरक्षण विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार संसद की विस्तारित बैठक बुला सकती है। इस तरह की चर्चाओं के बीच एक शीर्ष अधिकारी ने गुरुवार को कहा कि दो दिन के नोटिस पर ऐसी बैठक बुलाई जा सकती है।
संसद के दोनों सदनों की बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। हालांकि, मानसून सत्र का औपचारिक रूप से सत्रावसान नहीं हुआ है। यानी सत्र को आधिकारिक तौर पर समाप्त नहीं किया गया है।
मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त किए दो महीने से ज्यादा समय हो गया है। ऐसे में चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण कानून में संशोधन पारित कराने के लिए संसद की विशेष या विस्तारित बैठक बुला सकती है। ऐसी अटकलें भी लगाई जा रही हैं कि सरकार प्रस्तावित विधेयक को संसद के शीतकालीन सत्र तक नहीं टालना चाहती।
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अप्रैल में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। उस समय विस्तारित बैठक बुलाई गई थी। लेकिन सदन में पर्याप्त संख्या में समर्थन नहीं होने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।
सत्र का औपचारिक समापन होने पर क्या है नियम?
शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अगर संसद के सत्र का औपचारिक समापन हो जाता है, तो अगला सत्र बुलाने के लिए कम से कम 14 दिन पहले नोटिस देना जरूरी है। लेकिन अगर सत्र का औपचारिक समापन नहीं हुआ है, तो दो दिन के नोटिस पर संसद की विस्तारित बैठक बुलाई जा सकती है।
यहां प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से पूछा गया कि मानसून सत्र का औपचारिक समापन क्यों नहीं हुआ है। इस पर उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 85 के नियमों का पालन किया जा रहा है। अनुच्छेद 85 में संसद का सत्र बुलाने, सत्रावसान करने और संसद को भंग करने से जुड़े प्रावधान हैं। ये काम राष्ट्रपति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
पहले भी लंबे समय तक नहीं हुआ सत्रावसान
पहले भी कई बार संसद के सदनों का लंबे समय तक औपचारिक समापन नहीं हुआ है। एक बार यह अवधि 87 दिनों तक रही थी। ऐसे और भी उदाहरण हैं। वर्ष 1987 में संसद के दोनों सदनों का औपचारिक समापन 76 दिनों तक नहीं हुआ था। वर्ष 1989 में यह अवधि 54 दिन रही। वर्ष 2006 और 2013 में 49-49 दिन तक सत्र का औपचारिक समापन नहीं हुआ था। वहीं, वर्ष 1963 में यह अवधि 41 दिन रही थी।