राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे
- फोटो : पीटीआई
शिवसेना पहले की तरह मुखर और आक्रामक नहीं है। उद्धव मौके की नजाकत समझ रहे हैं और इस चुनाव में उनकी महत्वाकांक्षा अपने बेटे आदित्य ठाकरे को राज्य की मुख्य धारा की राजनीति में स्थापित कर देने की है। पहला मौका है जब शिवसेना के संस्थापक परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में उतरेगा।
वहीं, आत्मविश्वास के रथ पर सवार बीजेपी के लिए तीन तलाक और कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने के बाद महाराष्ट्र चुनाव पहली परीक्षा है। अत: वह भी शिवसेना को ज्यादा नाराज करने का जोखिम नहीं ले सकती।
शिवसेना में अंदर यह आशंका है कि बीजेपी कहीं 2014 के विधानसभा चुनाव की तरह ऐन मौके पर चुनाव-पूर्व गठबंधन न तोड़ दे। दोनों दलों में कार्यकर्ताओं को अंदर-अंदर सभी 288 सीटों पर चुनाव के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
विधायकों की टूट से असमंजस में कांग्रेस-एनसीपी
कांग्रेस-एनसीपी अपने 30 से ज्यादा पूर्व और मौजूदा विधायकों के बीजेपी-शिवसेना में चले जाने के बाद असमंजस में हैं। इन नेताओं के जाने का नतीजा तो चुनाव बाद दिखेगा, मगर अभी दोनों पार्टियों में नेतृत्व का संकट है। लोकसभा में मिली हार से अभी दोनों दल, उनके नेता और कार्यकर्ता नहीं उबार सके हैं। अंदरूनी झगड़े अलग हैं। कांग्रेस अपने पूर्व मुख्य मंत्रियों और राज्य से आने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्रियों को विधानसभा चुनाव में उतरने के लिए मना रही है।
2014-किसको कहां क्या मिला
- पश्चिम महाराष्ट्र (70)-बीजेपी 24, शिवसेना 13, कांग्रेस 10, एनसीपी 19, अन्य 04
- विदर्भ (62)-बीजेपी 44, शिवसेना 04, कांग्रेस 10, एनसीपी 01, अन्य 03
- मराठवाड़ा (46)- बीजेपी 15, शिवसेना 11, कांग्रेस 09, एनसीपी 08, अन्य 03
- कोंकण (39)- बीजेपी 10, शिवसेना 14, कांग्रेस 01, एनसीपी 08, अन्य 06
- मुंबई (36)-बीजेपी 15, शिवसेना 14, कांग्रेस 05, एनसीपी 00, अन्य 02
- उत्तर महाराष्ट्र (35)-बीजेपी 14, शिवसेना 07, कांग्रेस 07, एनसीपी 05, अन्य 02
- कुल (288)- बीजेपी 122, शिवसेना 63, कांग्रेस 42, एनसीपी 41, अन्य 20