पुलवामा हमले को अंजाम देने वाला मोहम्मद उमर फारूख भी अफगानिस्तान पहुंचा था। विस्फोटकों से भरी गाड़ी को किस तरह से टारगेट तक पहुंचाना है और उसे बस, जीप या कार के किस हिस्से के साथ टकराना है, इन सबके लिए उन्हें डेमो दिया गया था। अफगानिस्तान में अल-कायदा, तालिबान, जैश-ए-मोहम्मद और हक्कानी की कई टीमें काम करती हैं। इन्हें बम बनाने और आईईडी लगाने की खास तकनीक हासिल है।
पुलवामा हमले का प्लान 2016 में बना था। उस वक्त लोकल आतंकियों की एक सूची तैयार की गई थी। अफगानिस्तान में ट्रेनिंग के लिए कौन जाएगा, इसके लिए लोकल आतंकियों के साथ कई बार बातचीत हुई थी। उनका टेस्ट भी लिया गया था। सीआरपीएफ बस को उड़ाने का प्लान तैयार करने वाला आतंकी मोहम्मद उमर फारूख भी करीब डेढ़ साल तक अफगानिस्तान में रहा था। ट्रेनिंग लेने के बाद साल 2018 में वह जम्मू के सांबा सेक्टर से भारत में घुसा था।
जैश-ए-मोहम्मद ने उसे पुलवामा का आतंकी कमांडर बना दिया। वह पाकिस्तानी आतंकी मो. कामरान, इस्माइल उर्फ सैफुल्ला और कारि यासीर के संपर्क में बना रहा। पुलवामा हमले की कड़ियों को कैसे जोड़ना है, यह निर्देश उसे पाकिस्तानी आतंकी संगठनों से ही मिलते थे। उसके लोकल आतंकी साथी समीर डार और आदिल अहमद डार ने पुलवामा हमले का नक्शा तैयार किया था। इसे भी पाकिस्तान भेजा गया था। वहां से मंजूरी मिलने के बाद आईईडी बनाने का काम शुरू हुआ था।
पुलवामा हमले की तैयारियों पर नजर रख रहे जैश के चीफ मसूद अजहर, राउफ अजगर और अमर अलवी उर्फ चचा ने जनवरी 2019 में हमले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया था। उन्होंने अन्य आतंकियों को भी ट्रेनिंग दी थी। इनकी साजिश थी कि पुलवामा के बाद घाटी के दूसरे हिस्सों में भी ऐसे हमलों को अंजाम दिया जाए। बालाकोट एयर स्ट्राइक होने और मोहम्मद उमर फारूख को सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए जाने के बाद आतंकियों का वह प्लान आगे नहीं बढ़ सका।