भारत में साल 2023 में आए बाढ़, तूफान, भूकंप और अन्य आपदाओं के कारण करीब पांच लाख लोगों को आंतरिक विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ा। वर्ष 2022 में यह आंकड़ा करीब 25 लाख था। यानी देश में आपदाओं के कारण आंतरिक विस्थापन 80 प्रतिशत घट गया है।
जेनेवा के आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र (आईडीएमसी) की रिपोर्ट में दिल्ली को बाढ़ विस्थापन का हॉटस्पॉट बताया गया है। 9 जुलाई 2023 को यमुना नदी में बाढ़ आने की वजह से अधिकारियों को कई घर खाली करवाने पड़े थे। आईडीएमसी के मुताबिक, 2023 में यमुना में आई बाढ़ के दौरान करीब 27,000 लोगों को पलायन करना पड़ा। 9 जुलाई 2023 को दिल्ली में 24 घंटे के भीतर 153 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। यह वर्ष 1982 के बाद दिल्ली में एक दिन में हुई सबसे ज्यादा बारिश थी। जानकारी के मुताबिक, दक्षिण एशिया में 2023 में लगभग 37 लाख आंतरिक विस्थापन हुए। इसमें प्रकृतिक आपदाओं के कारण 36 लाख प्रभावित हुए, जो 2018 के बाद से सबसे कम आंकड़ा है।
हिमालयी राज्यों में बाढ़ ने मचाई तबाही
पिछले साल हिमाचल और उत्तराखंड में घातक बाढ़ ने तबाही मचाई थी। अक्तूबर 2023 में सिक्किम में हिमनद झील के फटने से बाढ़ के कारण एक पनबिजली बांध ढह गया, 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 88,000 से अधिक प्रभावित हुए।
अल नीनो को ठहराया जिम्मेदार...शोधकर्ताओं ने आपदाओं के कारण विस्थापन में गिरावट के लिए अल नीनो की घटना को जिम्मेदार ठहराया है। यह मानसून के दौरान औसत से कम वर्षा और कमजोर चक्रवात के मौसम को लाता है।