भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने सोमवार को बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण का पता लगाने के लिए चीन से आयात की गई रैपिड एंटीबॉडी जांच किट से सटीक परिणाम नहीं मिलने पर, भारत ने आपूर्तिकर्ता कंपनियों के विरुद्ध करार के मुताबिक कार्रवाई करते हुए आपूर्ति को रद्द कर दिया। उल्लेखनीय है कि चीन से पिछले सप्ताह आयात की गई त्वरित जांच किट से पश्चिम बंगाल सहित कुछ राज्यों में सटीक परिणाम नहीं मिलने के बाद आईसीएमआर ने इनके इस्तेमाल को फिलहाल रोक दिया था।
आईसीएमआर द्वारा जारी एक बयान में बताया गया है कि त्वरित जांच किट की आपूर्ति के सौदे से भारत को कोई आर्थिक क्षति नहीं हुई है। इसमें कहा गया है कि आईसीएमआर ने करार की शर्तों के तहत कंपनी को किट की आपूर्ति के एवज में अग्रिम भुगतान नहीं किया है।
इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने भी नियमित संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आईसीएमआर ने चीन की दो कंपनियों (बायोमेडीमिक्स और वोंडफो) से त्वरित जांच किट की खरीद का करार किया था। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों इन किट की आपूर्ति के बाद फील्ड परीक्षण के दौरान इनसे सटीक परिणाम नहीं मिलने पर आईसीएमआर ने आपूर्तिकर्ता कंपनियों के विरुद्ध करार की शर्तों के मुताबिक कार्रवाई की है।
देश को कोई आर्थिक नुकसान नहीं
त्वरित जांच किट की खरीद प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों के बारे में अग्रवाल ने कहा कि आईसीएमआर ने पूर्व निर्धारित खरीद प्रक्रिया का विधिवत पालन किया है। उन्होंने कहा कि आपूर्ति से पहले किट की कीमत का अग्रिम भुगतान नहीं किया था, इसलिए आर्थिक नुकसान का प्रश्न ही नहीं उठता है।
आईसीएमआर ने भी बयान में चीन की कंपनियों से त्वरित किट की खरीद प्रक्रिया का पूरी तरह से पालन किए जाने की जानकारी देते हुए कहा गया है कि किट की आपूर्ति के बाद फील्ड परीक्षण में खरा नहीं उतरने पर इनकी आगे की आपूर्ति को भी रद्द करने का फैसला किया गया है।
आईसीएमआर ने स्पष्ट किया कि किट की आपूर्ति संबद्ध कंपनी के भारत में एजेंट के माध्यम से की गई थी। आईसीएमआर ने कहा कि इसके लिए किए गए खरीद के करार में अग्रिम भुगतान के बजाय आपूर्ति के बाद किट के फील्ड परीक्षण में खरा उतरने पर भुगतान करने की शर्त के मुताबिक आपूर्तिकर्ता कंपनी को खरीद का भुगतान नहीं किया गया है। इसलिये इस खरीद से सरकार को कोई एक भी रुपये का नुकसान नहीं हुआ है।
4500 रुपये में किट खरीदने की खबर फर्जी : आईसीएमआर
इस बीच आईसीएमआर त्वरित परीक्षण किट की 4500 रुपये प्रति किट की दर से खरीद किए जाने का भी खंडन किया है। आईसीएमआर ने इस कीमत पर किट खरीदने के कांग्रेस नेता उदित राज द्वारा सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोप को गलत बताते हुये कहा कहा कि त्वरित जांच किट की खरीद 528 रुपये से 795 रुपये के बीच निर्धारित की गई कीमत पर की गई है।
उदित राज द्वारा ट्विटर पर लगाए गए आरोप के जवाब में आईसीएमआर ने कहा, ‘यह फर्जी खबर है। आईसीएमआर द्वारा मंजूर कीमत के मुताबिक आरटीपीसीआर किट की खरीद 740 से 1150 रुपये के बीच और त्वरित परीक्षण किट की खरीद 528 रुपये से 795 रुपये के बीच कीमत पर की गई है।’
आईसीएमआर ने संशोधित एडवाइजरी जारी की
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर) ने राज्य सरकारों को रैपिड एंटीबॉडी जांच को लेकर संशोधित एडवाइजरी जारी की है। आईसीएमआर ने राज्य सरकारों को लिखा है कि वह गुआंगझोउ वोंडफो और झुहाई लिवजोन डायग्नोस्टिक्स किट का इस्तेमाल न करें। बता दें कि चीन की इन दो कंपनियों ने भारत में करीब सात लाख रैपिड टेस्ट किट भेजी थीं, इनमें से कई किट्स में गड़बड़ी पाई गई थी।
आईसीएमआर ने इस संबंध में कहा कि राज्यों को सलाह दी जाती है कि इन दोनों कंपनियों की टेस्ट किट का इस्तेमाल न करें और इन किट को वापस इनके सप्लायर को भेज दें। वहीं, भारत सरकार ने रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट की खरीद को लेकर कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि आईसीएमआर ने इन किट की आपूर्ति के संबंध में अभी कोई भुगतान नहीं किया है।