कोरोना वायरस की जांच करता कर्मचारी
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केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के मामले कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि अचानक एक दिन केरल में 17 हजार से भी ज्यादा मामले रिपोर्ट हुए। इन दो राज्यों खासकर केरल में कोविड के मामले कम होने की बजाय बढ़ने से केंद्र सरकार चिंतित है। आईसीएमआर और कोविड टास्क फोर्स दोनों राज्यों में यह जानने के लिए शोध कर रहा है कि क्या वास्तव में दोनों राज्यों में कोरोना के वायरस का स्वरूप बदल गया है।
पूरे देश में सबसे ज्यादा कोरोना के मामले महाराष्ट्र और केरल में रिपोर्ट हो रहे हैं। दो सप्ताह पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आईसीएमआर और नेशनल कोविड टास्क फोर्स से जानने के लिए कहा था कि कहीं ऐसा तो नहीं दोनों राज्यों के वायरस में डेल्टा और डेल्टा प्लस के अलावा कोई नया वैरिएंट मामले बढ़ा रहा हो। आईसीएमआर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र और केरल के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों से नमूने एकत्रित किए गए। उन्होंने बताया की वायरस के बदले हुए स्वरूप को जांचने की प्रक्रिया तकरीबन पूरी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है शुक्रवार दोपहर तक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से अगर वायरस का कोई बड़ा बदला हुआ स्वरूप सामने आएगा तो उसको साझा किया जाएगा।
आईसीएमआर से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि निश्चित तौर पर केरल और महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों का कम न होना चिंता का विषय है। उनका कहना है कि जब देश के अलग-अलग राज्यों में डेल्टा वैरीएंट के मामले ना सिर्फ कम हुए बल्कि रिकवरी भी हुई और हालात तकरीबन सामान्य होने लगे। बावजूद इसके केरल और महाराष्ट्र में हालात बेहतर नहीं हुए और केरल में तो मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में महामारी प्रोटोकॉल के तहत वैरिएंट के बदलाव की जांचा करना जरूरी हो जाता है।