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ICJ: बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हिंसा पर सेलिब्रिटियों की चुप्पी पर उठे सवाल, रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा

Wed, 07 Jan 2026 05:28 AM IST
नितिन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

आईसीजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सवाल किसी अभिनेता या अभिनेत्री के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह नैतिकता का मामला है। आईसीजी की रिपोर्ट में इसे कड़वी लेकिन अहम सच्चाई बताया गया है।
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बांग्लादेश हिंसा को लेकर देश में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय संघर्षों पर सार्वजनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं अक्सर मानवीय संवेदना के नाम पर आती हैं, पर हालिया घटनाक्रम असहज सवाल खड़ा करता है। इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप  (आईसीजी) का आकलन है कि जब गाजा में इस्राइली सैन्य कार्रवाई के दौरान नागरिक हताहतों की खबरें आईं, तब भारतीय सेलिब्रिटी, विपक्षी नेता और वैश्विक मंच सक्रिय दिखे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक युद्धविराम की कोशिशों में उतरे। लेकिन अब, जब बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों   की हत्याएं,मंदिरों में तोड़फोड़, घरों में आगजनी की रिपोर्टें सामने हैं, वही मुखरता गायब  है।
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आईसीजी के अनुसार जब मानवाधिकारों की भाषा भू-राजनीति, पहचान-राजनीति या वैश्विक ट्रेंड से संचालित होने लगे, तब वह चयनात्मक नैतिकता का रूप ले लेती है। दक्षिण एशिया  केंद्रित विश्लेषण बताते हैं कि अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा पर यदि सामाजिक व सार्वजनिक चुप्पी रहती है तो वह धीरे-धीरे सामान्यीकृत होने लगती है। यही वह बिंदु है जहां मौजूदा वैश्विक विमर्श पर सवाल खड़े होते हैं।

फलस्तीन मुद्दा : वैश्विक नैरेटिव और भारतीय सार्वजनिक प्रतिक्रिया
विश्लेषण के अनुसार, गाजा संघर्ष के दौरान पश्चिमी मीडिया में नागरिक हताहतों की तस्वीरें, बच्चों व अस्पतालों पर हमलों की रिपोर्टें लगातार प्रसारित होती रहीं। राजनीतिक स्तर पर कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने नागरिक हत्याओं की निंदा की। न्यूयॉर्क के नए मेयर जोहरान ममदानी सहित कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने युद्धविराम की मांग को समर्थन दिया।
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गाजा संघर्ष के दौरान भारतीय फिल्म उद्योग और सेलिब्रिटी जगत का बड़ा वर्ग सोशल मीडिया पर अत्यंत सक्रिय रहा। ओपन-डोमेन रिकॉर्ड के अनुसार अभिनेत्री करीना कपूर खान ने गाजा में नागरिक हताहतों पर चिंता जताते हुए युद्ध रोकने से जुड़े संदेश साझा किए। करिश्मा कपूर ने फलस्तीन समर्थक पोस्ट्स को री-शेयर किया। आलिया भट्ट ने युद्ध प्रभावित बच्चों से जुड़े वैश्विक अभियानों को स्टोरी में साझा किया। इसी क्रम में सोनाक्षी सिन्हा, स्वरा भास्कर, दिया मिर्जा, नंदिता दास, रिचा चड्ढा, अनुभव सिन्हा, जोया अख्तर और फरहान अख्तर ने भी नागरिक सुरक्षा और युद्धविराम से जुड़े संदेश पोस्ट या री-पोस्ट किए।

कड़वी लेकिन आवश्यक सच्चाई
आईसीजी का कहना है कि यह रिपोर्ट किसी एक अभिनेता, अभिनेत्री या विचारधारा के विरुद्ध नहीं है। यह प्रश्न सार्वजनिक नैतिकता का है। फलस्तीन के लिए आवाज उठाना मानवता है, पर बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा पर चुप्पी उसी मानवता की सबसे कठिन परीक्षा है। यदि मानवाधिकार चयनात्मक हो जाएं तो राजनीतिक औजार बन जाते हैं।
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