फरवरी में रनवे पर हुए हादसे के बाद भारतीय वायुसेना के सभी 34 तेजस विमानों को ग्राउंडेड कर दिया गया था। एचएएल ने अब विमान के सॉफ्टवेयर की खामी को ठीक कर लिया है। 8 अप्रैल से ये विमान दोबारा उड़ान भरेंगे। इसके अलावा, अमेरिकी कंपनी जीई एयरोस्पेस की ओर से इंजन आपूर्ति में हो रही देरी के कारण नए तेजस विमानों की डिलीवरी भी प्रभावित हुई हैं।
भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के बेड़े में शामिल स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एक बार फिर उड़ान भरने के लिए तैयार हैं। करीब दो महीने के लंबे इंतजार के बाद अगले हफ्ते से यह विमान आसमान में हुंकार भरते नजर आएंगे। एक फ्रंटलाइन एयरबेस पर हुए हादसे के बाद सुरक्षा के लिहाज से वायुसेना ने तेजस के पूरे बेड़े की उड़ानों पर रोक लगा दी थी।
विज्ञापन
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक डी के सुनील ने इस खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि वायुसेना के बेड़े में शामिल सभी 34 तेजस विमानों के सॉफ्टवेयर में आई तकनीकी खामी को पूरी तरह से ठीक कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल से ये सभी विमान फिर से अपनी रूटीन उड़ानों पर लौट आएंगे।
क्यों लगी थी विमानों पर रोक?
दरअसल, इस साल फरवरी के पहले हफ्ते में एक तेजस विमान रनवे से आगे निकल गया था, जिससे उसके एयरफ्रेम को नुकसान पहुंचा था। शुरुआती जांच में ब्रेक फेल होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने बेहद सतर्कता बरतते हुए विमानों की व्यापक जांच के आदेश दिए थे। अब सॉफ्टवेयर से जुड़े उस खामी को दुरुस्त कर लिया गया है, जिसके चलते यह समस्या आई थी।
नए विमानों की डिलीवरी में देरी क्यों?
एचएएल के सीएमडी ने तेजस के नए और ज्यादा एडवांस वेरिएंट 'मार्क 1A' की डिलीवरी पर भी बात की। उन्होंने भरोसा जताया कि दिसंबर तक कंपनी वायुसेना को 20 से ज्यादा नए जेट सौंपने की स्थिति में होगी। इनमें से 6 विमान जल्द ही वायुसेना को मिल सकते हैं, क्योंकि उनके रडार, एवियोनिक्स और मिसाइल-फायरिंग सिस्टम का फाइनल टेस्ट चल रहा है।
हालांकि, विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी की मुख्य वजह अमेरिकी कंपनी 'जीई एयरोस्पेस' है। यह कंपनी तेजस को ताकत देने वाले F-404 एयरो इंजन की सप्लाई समय पर नहीं कर पा रही है और कई डेडलाइन मिस कर चुकी है। जीई ने अब तक केवल 5 इंजन ही एचएएल को दिए हैं।