Fifth-Generation Fighter Jets: भारत पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रहा है। इसमें अमेरिका और रूस प्रमुख रूप से ये विमान बना रहे हैं। भारत के नए लड़ाकू विमान खरीदने की मुख्य वजह सीमा पर दो बड़े दुश्मन चीन और पाकिस्तान से मुकाबले में आगे रहना है।
भारतीय वायुसेना (आईएएफ) अपनी युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए दो से तीन स्क्वाड्रन (लगभग 40 से 60) पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विदेशों से खरीदने की योजना बना रही है। यह कदम तब तक के लिए है जब तक देश में ही विकसित हो रहा एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) प्रोजेक्ट पूरी तरह से तैयार नहीं हो जाता। एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर 18 से 20 लड़ाकू विमान होते हैं। वायुसेना ने हाल ही में सरकार को एक विस्तृत प्रस्तुति दी है, जिसमें भविष्य की जरूरतों और सीमाओं पर दबदबा बनाए रखने के लिए तैयार की गई रणनीति को समझाया गया है।
उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर खास ध्यान
सरकार के एक उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता कर रहे रक्षा सचिव आर.के. सिंह की अगुवाई में यह सिफारिश की गई है कि वायुसेना को पांचवीं पीढ़ी के विमान दिए जाएं ताकि भारत की सीमाओं पर खासतौर से उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर दुश्मनों को कड़ा संदेश दिया जा सके।
विज्ञापन
चीन-पाकिस्तान की तैयारी के मद्देनजर निर्णय जरूरी
रक्षा सूत्रों के अनुसार, चीन पहले ही छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान पर काम कर रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में वह अपने पांचवीं पीढ़ी के विमानों को पाकिस्तान को भी दे सकता है। ऐसे में भारत के लिए यह कदम समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।
अमेरिका और रूस मुख्य विकल्प
भारत जिन दो देशों से पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर रहा है, वे हैं अमेरिका और रूस। अमेरिका ने भारत को अपने अत्याधुनिक एफ-35 फाइटर जेट की पेशकश की है। वहीं रूस ने Su-57 जेट का विकल्प रखा है, जिसे वह पहले ही अपने बेड़े में शामिल कर चुका है।
एफजीएफए परियोजना में वापसी की संभावना
भारत पहले रूस के साथ मिलकर एक पांचवीं पीढ़ी का फाइटर एयरक्राफ्ट (एफजीएफए ) विकसित करने की योजना में शामिल था लेकिन कुछ साल पहले इस परियोजना से बाहर हो गया था। अब एक बार फिर उसमें शामिल होने का विकल्प खुला है।
मेक इन इंडिया के तहत 114 नए फाइटर जेट भी प्लान में
इसके साथ ही भारत सरकार एक अलग परियोजना के तहत 114 आधुनिक 4.5+ पीढ़ी के लड़ाकू विमान विदेशी साझेदारों के साथ मिलकर भारत में ही बनाने की योजना पर भी विचार कर रही है। यह सौदा संभवतः सरकार-से-सरकार के बीच तय किया जाएगा।