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IAF Chief: वायु सेना प्रमुख एपी सिंह आज भी अपनी पत्नी से सीखते है कई बातें, छात्रों को क्यों सुनाया ये किस्सा?

सार

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने छात्रों से संवाद के दौरान कहा, जीवन में कई पड़ाव आएंगे और हर कदम पर सीखते रहना जरूरी है। उन्होंने कहा, 'मैं आज भी लर्निंग नहीं छोड़ता हूं। आज भी कई नई बातें मुझे अपनी पत्नी से सीखने को मिलती है। आज के उद्बोधन के बाद भी वह मुझे बताएगी कि, मैंने आज कार्यक्रम में कम बोला या ज्यादा बोला है।' जानिए छात्रों के साथ उन्होंने ये किस्सा क्यों साझा किया
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अहमदाबाद के कार्यक्रम में वायुसेना प्रमुख और अन्य - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने गुरुवार को कहा, वह आज भी व्यस्तता के बावजूद कोई भी नई चीज सीखने का मौका नहीं छोड़ते है। वह आज भी कई नई बातें अपनी पत्नी से सीखते है। जब वे कही गलत होते है तो उनकी पत्नी उन्हें टोकती भी है।

दरअसल, वायु सेना प्रमुख कर्णावती विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए गुरुवार शाम को गुजरात की राजधानी गांधी नगर पहुँचे थे। वे कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। अपने उद्बोधन में छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,  मैं हमेशा मानता हूं कि जीवन में सीखना कभी नहीं रुकना चाहिए। यह जीवन का लगातार चलता रहने वाला हिस्सा होना चाहिए, चाहे हम किसी भी मुकाम पर क्यों न हों।

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छात्र याद रखें, सीखने और आगे बढ़ने की यह यात्रा यहीं खत्म नहीं होती यह तो बस शुरुआत है। जीवन में कई पड़ाव आएंगे और हर कदम पर सीखते रहना जरूरी है। मैं आज भी लर्निंग नहीं छोड़ता हूं। आज भी कई नई बातें मुझे अपनी पत्नी से सीखने को मिलती है। आज के उद्बोधन के बाद भी वह मुझे बताएगी कि, मैंने आज कार्यक्रम में कम बोला या ज्यादा बोला है। जब वायुसेना प्रमुख मंच से अपना उद्बोधन दे रहे थे, तब उनकी पत्नी सरिता सिंह भी बतौर श्रोता कार्यक्रम में मौजूद थी।

समारोह के दौरान वायुसेना प्रमुख को कर्णावती विश्वविद्यालय की ओर से मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी गई। यह सम्मान उन्हें देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट सेवाओं और नेतृत्व के लिए प्रदान किया गया है। सम्मान प्राप्त करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालय का आभार जताया और कहा कि यह मेरे लिए बेहद खास पल है, खासकर ऐसे समय में जब शिक्षा और तकनीक दोनों तेजी से बदल रहे हैं। उन्होंने छात्रों से कहा, जीवन आपको जहां भी ले जाए, हमेशा विनम्र रहे और जमीन से जुड़े रहें।

हमेशा अपनी जड़ों पर गर्व करें। सबसे पहले एक अच्छा इंसान बनें। जो चीज़ हमें बांटती है, वह कभी अच्छी नहीं होती। अपनी मिट्टी, अपने भारत से जुड़े रहें। याद रखें आप सबसे पहले भारतीय हैं। कार्य्रकम में उन्होंने स्नातक छात्रों को उनकी उपलब्धियों पर बधाई दी और कहा कि आगे की यात्रा में भी वे ज्ञान और अनुभव से खुद को निरंतर समृद्ध करते रहें।

कार्यक्रम में फ़िल्म कलाकार और निर्देशक सौरभ शुक्ला भी शामिल हुए। कर्णावती विश्वविद्यालय की तरफ से उन्हें भी डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आज की तेजी से बदलती दुनिया में बौद्धिक साहस और स्वतंत्र सोच बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन और करियर में हमेशा जिज्ञासु, संवेदनशील और मौलिक बने रहें। उन्होंने विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटिलिजेस को लेकर चलाए जा रहे कोर्स को सराहा। उन्होंने छात्रों को बताया कि वह भी पिछले 4 माह से एआई को सीख और समझ रहे है।

कर्णावती विश्वविद्यालय के अध्यक्ष रितेश हाड़ा ने समारोह में कहा, विश्वविद्यालय में छात्रों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के साथ-साथ हमारे लिए सबसे बड़ी और पवित्र जिम्मेदारी भारतीय सेना की सेवा करना भी है। आज हमारा विश्वविद्यालय और छात्र हमारी सेना की सेवा अपने शोध और नवाचार के माध्यम से कर रहे है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के डिजाइन, बिजनेस, लिबरल आर्ट्स एंड मास कम्युनिकेशन, लॉ, टेक्नोलॉजी और डेंटिस्ट्री स्कूलों के छात्रों को डिग्रियां और गोल्ड मेडल प्रदान किए गए।

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इस दौरान विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों और उत्कृष्टता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सम्मान किया गया। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने छात्रों को दीक्षांत शपथ दिलाई। जिसमें ईमानदारी, जिम्मेदारी और समाजसेवा के मूल्यों को दोहराया गया। इस वर्ष विश्वविद्यालय के छह प्रतिष्ठित स्कूलों से कुल 1,400 छात्रों ने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। गांधीनगर स्थित यह 36 एकड़ में फैला कैंपस हर साल आठ हजार से अधिक विद्यार्थियों का शैक्षणिक केंद्र बना रहता है।

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