इंडो-अमेरिकन चेंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) का दावा है कि भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय कारोबार जल्द ही 5,000 करोड़ डॉलर का आंकड़ा छुएगा। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों की सराहना करते हुए, आईएसीसी के अध्यक्ष पंकज बोहरा ने कहा है कि 2023 में दोनों देशों ने 2,000 करोड़ डॉलर का रिकॉर्ड द्विपक्षीय कारोबार किया है। अमेरिका आज भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया है। दोनों देशों के बीच जिस तेजी से कारोबारी संबंध विकसित हो रहे हैं, बहुत जल्द आपसी कारोबार 5,000 करोड़ डॉलर पहुंच जाएगा।
कॉर्पोरेट और कानूनी मुद्दों पर भारत-अमेरिका सहयोग पर पहले भारत-अमेरिका कानूनी सेवा शिखर सम्मेलन के दौरान बोहरा ने कहा कि 55 साल पहले जब यह चैंबर अस्तित्व में आया था, तब भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार 600 करोड़ डॉलर था। आज यह 2,000 करोड़ डॉलर है और जल्द ही 5,000 करोड़ डॉलर का लक्ष्य हासिल करने पर काम कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि 55 वर्षों के इतिहास में से बीते 5 वर्षे में जिस तेजी से दोनों देशों के संबंधो में प्रगाढ़ता आई है, उससे 5,000 करोड़ कारोबार का लक्ष्य अब मुश्किल नहीं लगता है।
भारत के लिए द्विपक्षीय कारोबार अहम
आईएसीसी की राष्ट्रीय विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष ललित भसीन ने कहा कि 2047 तक विकसित देश बनने के भारत के लक्ष्य के लिए भारत-अमेरिका कोरोबारी संबंध बेहद अहम हैं। दोनों देश जिस तेजी से सहयोग कर रहे हैं उससे कानूनी पेशेवरों के बीच सहयोग भी एक बड़ी जिम्मेदारी है। भसीन ने कहा कि अमेरिकन बार एसोसिएशन और बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया वसोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स मिलकर दोनों देशों के विधिक पेशेवरों में संपर्क बनाने का प्रयास करेंगे।
अटॉर्नी जनरल ने किया सहयोगी कानून मंच बनाने का आह्वान
भारत-अमेरिका कानूनी सेवा शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि कानून और न्याय के क्षेत्र में जीवंत विनिमय के लिए भारत-अमेरिका तुलनात्मक और सहयोगी कानून मंच बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वैश्विक ज्ञान और संसाधनों पर आधारित हमारा एक साझा वैश्विक कानूनी दृष्टिकोण और लक्ष्य होना चाहिए।
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान भारत अपने शीर्ष 10 में से 9 कारोबारी साझेदारों के साथ व्यापार घाटे का सामना कर रहा है। शीर्ष 10 में से सिर्फ अमेरिका है, जिसके साथ भारत घाटे के बाजाय करीब 200 करोड़ डॉलर के फायदे में है। भारत-अमेरिका के द्विपक्षीय कारोबार में पिछले कुछ वर्षों में हथियारों की खरीद-फरोख्त की वजह से खासी वृद्धि हुई है।