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लिटरेरी फेस्ट: गीतकार मनोज मुंतशिर बोले- दिल से लिखता हूं, तभी बच्चों के साथ बुजुर्ग भी थिरकते हैं

Mon, 08 Oct 2018 06:23 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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गीतकार और कहानीकार मनोज मुंतशिर ने रविवार को गोरखपुर लिटरेरी फेस्ट ‘शब्द-संवाद’ की महफिल लूट ली। युवाओं के बीच अपनी सफलता की कहानी सुनाई। कहा कि गौरीगंज अमेठी में भैंस की पूंछ मरोड़कर पला-बढ़ा हूं। दिल से लिखता हूं, जो कान से होकर दिमाग और दिल को छू जाता है। ... मेरे रश्के कमर को नए अंदाज में पेश किया है। इस गीत पर छोटे बच्चे, युवा और बुजुर्ग भी थिरकते हैं। सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज में पिता शिव प्रताप शुक्ला और मां प्रेमा शुक्ला के साथ आए मनोज मुंतशिर ने युवाओं का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि जब तक कोई बैठने को न कहे तब तक खड़े रहें। 

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मुकाम हासिल करें, फिर बराबर में बैठने की कोशिश करें। यही मैंने किया है। मुंबई मायानगरी है। ग्लैमर के चक्कर में पड़कर वहां पहुंचे तो परेशान हो जाएंगे। आपके पास कुछ कहने और बताने को हो, तभी मुंबई जाएं। आप जितना पढ़ेंगे, उतना ही अच्छा लिखेंगे। पढ़ना भरना और लिखना छलकना है। भाषा वही अच्छी है, जो सामान्य व्यक्ति की समझ में आए। अब गाने में भी इसी पैटर्न पर लिखे जा रहे हैं। उन्होंने नए गीतकारों को उर्दू पढ़ने और समझने की सलाह दी। 
 
फिल्म, इल्म के बीच दीवार खड़ी करना गलत

गीतकार ने कहा कि फिल्म और इल्म के बीच दीवार खड़ी करने की कोशिश की जाती है। यह गलत है। फिल्मों का साहित्य से गहरा नाता है। मुंतशिर ने कैफी आजमी और फिराक गोरखपुरी के कई शेर सुनाए। फिर सभागार में बैठे लोगों से पूछा कि फिल्म और इल्म में कोई अंतर है क्या? तालियों की गड़गड़ाहट के साथ लोगों का जवाब था नहीं। मुंतशिर ने कहा कि जो लोग कहते हैं कि फिल्मकार इल्मदार नहीं होते हैं, मैं उनकी निंदा करता हूं।
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‘तनुश्री मामले में जांच के बाद हो कार्रवाई’

बाहुबली, रुस्तम और बादशाहो सहित कई फिल्मों के लिए गीत, पटकथा लिखने वाले मनोज मुंतशिर ने अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी। एक सवाल पर मनोज ने कहा कि इस मामले में कौन दोषी है, वह नहीं जानते। यह काम जांच एजेंसी का है लेकिन कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। अब जरूरत घूरती निगाहों को गिराने की है।

अपनी प्रेम कथा सुनाई तो बजीं तालियां

मनोज ने 11, 12वीं कक्षा की अपनी प्रेम कहानी सुनाई तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने कहा कि एक दिन अचानक प्रेमिका आई और बोली, अब मैं आपके साथ शादी नहीं कर सकती हूं। आप मेरे पापा को पसंद नहीं हैं। वे चाहते हैं दामाद डॉक्टर बने। आप गाना-बजाना करते हैं। यही नहीं, प्रेमिका ने अपनी फोटो और चिट्ठी तक मांग ली लेकिन मैंने भी कहा ये सब तो ठीक है। मेरी दो साल की जवानी वापस कौन देगा।

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