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जेंड्रर न्यूट्रल ट्रांस पॉलिसी: हैदराबाद लॉ यूनिवर्सिटी के इस नीति की क्यों हो रही है चर्चा, छात्रों को क्या मिलेगा फायदा?

Sun, 27 Mar 2022 11:23 AM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

कुलपति फैजान मुस्तफा के मीडिया को दिए बयान के मुताबिक विश्वविद्यालय का उद्देश्य एक सुरक्षित और समावेशी परिसर बनाना है। विश्वविद्यालय किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में लिंग आधारित ड्रेस कोड या हेयर स्टाइल पर जोर नहीं देगा
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हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी ने जेंड्रल न्यूट्रल ट्रांस पॉलिसी को अपनाया है। - फोटो : @NALSAR_Official
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विस्तार
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हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च ने सात साल पहले पहली बार एक छात्र को जेंडर (लिंग-तटस्थ) सर्टिफिकेट दिया था। करीब सात साल बाद यूनिवर्सिटी ने लैंगिक समानता की ओर एक बड़ा कदम उठाते हुए जेंड्रर न्यूट्रल ट्रांस पॉलिसी को अपनाने का फैसला किया है, ताकि सिर्फ महिला और पुरुष की बात न की जाए। अब लेस्बियन, गे और ट्रांसजेंडर छात्र स्वेच्छा से अपनी पहचान के साथ कैंपस में रह सकते हैं। 

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कुलपति फैजान मुस्तफा के मीडिया को दिए बयान के मुताबिक विश्वविद्यालय का उद्देश्य एक सुरक्षित और समावेशी परिसर बनाना है।

यूनिवर्सिटी के ट्ववीट के मुताबिक एकेडमिक ब्लॉक के ग्राउंड फ्लोर का वॉशरूम भी जेंडर न्यूट्रल है। जीएच -6 भवन में एक छात्रावास है। यूनिवर्सिटी की योजना आने वाले समय में एक जेंड्रर न्यूट्रल छात्रावास बनाने की भी है।
 
क्या फायदा होगा?
कुछ साल पहले तक भारत में ट्रांसजेंडर किसी भी सरकारी फॉर्म में अपने जेंडर के बारे में नहीं बता सकते थे। 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें थर्ड जेंडर का दर्जा दिया। लेकिन ट्रांस लोगों को अक्सर भेदभाव का सामना करना पड़ता है। गलत नजर से देखे जाने की वजह से सामाजिक सेटिंग्स में वे अपनी पहचान को छुपा कर रखने का दबाव अनुभव करते हैं। माना जा रहा है कि हैदराबाद लॉ यूनिवर्सिटी की यह पहल ऐसे छात्रों को स्वतंत्रता से शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने का एक जरिया बन सकती है।
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LGBTQ+ समुदाय की चिंताओं को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय के पास पहले से ही एक अंतरिम नीति है और एक अंतिम नीति पर भी काम चल रहा है। 

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Faizan Mustafa - फोटो : @VC_NALSAR
इसकी शुरुआत कैसे हुई?
जून 2015 में, एक 22 वर्षीय बीए एलएलबी छात्र ने यूनिवर्सिटी से अनुरोध किया कि स्नातक प्रमाणपत्र में उसके लिंग की पहचान का उल्लेख नहीं किया जाए। यूनिवर्सिटी ने तुरंत उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया। समावेशी परिसर बनाने के लिए यह संस्था के प्रयासों की शुरुआत थी।

विश्वविद्यालय की नीति में क्या है?
यूनिवर्सिटी के कुलपति के बयान के मुताबिक हमारी योजना और भी स्थानों को लिंग-तटस्थ बनाने की है। छात्रों को अपनी पसंद के हिसाब से अपनी पहचान बनाने का अनुरोध किया गया है और उनकी पसंद के आधार पर ही सभी के लिए सुरक्षित और समावेशी स्थान बनाया जाएगा। जिस ट्रांस पॉलिसी को हम अपना रहे हैं, उसके मुताबिक कैंपस में और बदलाव होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी की नीति के अनुसार, छात्रों के सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड छात्रों के लिंग के पहचान के आधार पर दिए जाएंगे। 

स्वयं बताए गए लिंग पहचान से छात्रों की सुरक्षा और उनके अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।

छात्रों को अपने साथ होने वाले भेदभाव की शिकायत दर्ज करने का अधिकार हासिल होगा।

विश्वविद्यालय किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में लिंग आधारित ड्रेस कोड या हेयर स्टाइल पर जोर नहीं दे सकता है।
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