इसकी शुरुआत कैसे हुई?
जून 2015 में, एक 22 वर्षीय बीए एलएलबी छात्र ने यूनिवर्सिटी से अनुरोध किया कि स्नातक प्रमाणपत्र में उसके लिंग की पहचान का उल्लेख नहीं किया जाए। यूनिवर्सिटी ने तुरंत उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया। समावेशी परिसर बनाने के लिए यह संस्था के प्रयासों की शुरुआत थी।
विश्वविद्यालय की नीति में क्या है?
यूनिवर्सिटी के कुलपति के बयान के मुताबिक हमारी योजना और भी स्थानों को लिंग-तटस्थ बनाने की है। छात्रों को अपनी पसंद के हिसाब से अपनी पहचान बनाने का अनुरोध किया गया है और उनकी पसंद के आधार पर ही सभी के लिए सुरक्षित और समावेशी स्थान बनाया जाएगा। जिस ट्रांस पॉलिसी को हम अपना रहे हैं, उसके मुताबिक कैंपस में और बदलाव होंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनिवर्सिटी की नीति के अनुसार, छात्रों के सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड छात्रों के लिंग के पहचान के आधार पर दिए जाएंगे।
स्वयं बताए गए लिंग पहचान से छात्रों की सुरक्षा और उनके अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे।
छात्रों को अपने साथ होने वाले भेदभाव की शिकायत दर्ज करने का अधिकार हासिल होगा।
विश्वविद्यालय किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में लिंग आधारित ड्रेस कोड या हेयर स्टाइल पर जोर नहीं दे सकता है।