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बच्चे की मौत पर मानवाधिकार आयोग का हरियाणा सरकार को नोटिस, कहा- एम्बुलेंस में लगाएं जीवन रक्षक उपकरण

Sat, 25 Aug 2018 09:38 AM IST
डिजिटल ब्यूरो, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हरियाणा सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को नोटिस जारी किया है। आयोग ने यह नोटिस 22 अगस्त को सोनीपत में कांग्रेस की साइकिल रैली के दौरान एंबुलेंस में नवजात की मौत के मामले में जारी किया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक आयोग ने इस मामले में हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव से चार हफ्तों में रिपोर्ट मांगी है। साथ ही आयोग ने पीड़ित परिवार को राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराए जाने को लेकर भी विवरण मांगा है।

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साथ ही आयोग ने हरियाणा के डीजीपी से भी इस मामले में एफआईआर दर्ज करने तथा मामले की जांच की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है। इस मामले में कुंडली पुलिस स्टेशन में धारा 304ए और मोटर व्हीकल एक्ट 177 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले की जांच के लिए और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में जांच टीम गठित की गई है, जिसमें एसएचओ समेत दो निरीक्षण अधिकारी शामिल हैं।

इसके अलावा, आयोग ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को सभी एम्बुलेंस को जीवन रक्षक उपकरण से लैस करने के लिए चार सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट जमा करने के लिए निर्देश दिया है। आयोग ने कहा है कि ऐसी डिवाइसेज सरकारी, आउटसोर्स या निजी स्वामित्व वाली सभी एम्बुलेंस लगायी जानी चाहिए।
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आयोग ने मीडिया की खबरों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की एम्बुलेंस थी और अगर ट्रैफिक सामान्य होता तो नवजात बच्चे की जान बचाई जा सकती थी और उसके जीने के अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। आयोग के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि यातायात नियंत्रण को लेकर पुलिस अधिकारियों और प्रशासन ने लापरवाही बरती है, जिसके चलते यह हादसा हुआ।

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आयोग ने कहा, यह पहली बार नहीं हुआ है

आयोग का कहना है कि यह पहली बार नहीं हुआ है, जब सड़कों पर आंदोलन, राजनीतिक रैली या वीआईपी मूवमेंट की वजह से किसी की जान गई हो। इस समस्या का गहराई से विश्लेषण करने और प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाए जाने की जरूरत है, ताकि ऐसी गतिविधियों के चलते किसी का बहुमूल्य मानव जीवन खोने न पाए।

इसके लिए खासतौर पर एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों के लिए सड़कों पर यातायात को आसान बनाने की जरूरत है। इस हादसे के पीछे दो मुख्य वजह रही हैं, पहली ये कि एम्बुलेंस के लिए अलग से पैसेज की व्यवस्था प्रावधान नहीं था, और दूसरी, एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर जैसे आपातकालीन उपकरण नहीं थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नवजात बच्चे के परिजनों का आरोप है कि रैली के चलते वे ट्रैफिक जाम में 45 मिनट तक फंसे रहे और एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था नहीं थी। नवजात को पहले सोनीपत रैफर किया गया और बाद में रोहतक हॉस्पिटल भेज दिया गया, लेकिन डेढ़ घंटा देरी के चलते रास्ते में ही नवजात बच्चे ने दम तोड़ दिया। एम्बुलेंस स्टाफ का दावा है कि डीजे के कानफाड़ू शोर में एम्बुलेंस का सायरन और बच्चे के रोने की आवाज दब गई और उसने दम तोड़ दिया।
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