सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में गाड़ियों की बढ़ती संख्या को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इसमें भी 'हम दो हमारे दो' अभियान जैसी शुरुआत होनी चाहिए। कोर्ट ने एक ही व्यक्ति के पास कई गाड़ियों के होने को लेकर चिंता व्यक्त की है।
जस्टिस मिश्रा ने कहा, "परिवार के हर कमाऊ सदस्य के पास गाड़ी है, लेकिन एक व्यक्ति के पास पांच गाड़ी.. यहां गाड़ियों का परिवार नियोजन होना चाहिए। हम दो हमारे दो।"
इससे पहले सुनवाई में जस्टिस मिश्रा ये बोल चुके हैं कि उन्होंने सेवानिवृति के बाद दिल्ली में रहने की अपनी योजना को समाप्त कर दिया है।
वहीं जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा, "एक कमाऊ व्यक्ति के पास गाड़ी का होना समझ में आता है। लेकिन एक व्यक्ति जिसके पास पांच गाड़ियां हैं, घरों में गाड़ियों के लिए भी परिवार नियोजन होना चाहिए।"
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में गाड़ियों की संख्या एक करोड़ से ऊपर पहुंच चुकी है। प्रतिवर्ष गाड़ियों की संख्या में 7 लाख की वृद्धि दर्ज की जा रही है। आए दिन पार्किंग को लेकर झगड़ा होता है और प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। गाड़ियों को खड़ा करने के लिए जगह की भी कमी है।
सुप्रीम कोर्ट ने बजाज ऑटो की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने ऑटो की खरीद पर कैप लगा रखा है और बजाज ऑटो ने इस रोक को खत्म करने के लिए कोर्ट में याचिका दी थी। बजाज ऑटो का कहना है कि ऑटो से होने वाला प्रदूषण तुलनात्मक रूप से कम होता है इसलिए कोर्ट को बिक्री पर लगी पाबंदी हटा देनी चाहिए।