श्रमजीवी एक्सप्रेस बम विस्फोट कांड के आरोपी हूजी के आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को अदालत ने बुधवार को फांसी की सजा सुनाई। मामले में कोर्ट ने उसे मंगलवार को ही दोषी करार दिया था। इससे पहले कोर्ट ने इसी मामले में मोहम्मद आलमगीर उर्फ रोनी को 30 जुलाई को फांसी की सजा सुना चुकी है।
बुधवार दोपहर हूजी के आतंकी ओबैदुर्रहमान उर्फ बाबू भाई को पुलिस ने अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम बुधिराम यादव की अदालत में पेश किया। दंड के प्रश्न पर सुनवाई शुरू हुई। जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार यादव ने इसे विरलतम मामला बताया। उन्होंने कहा कि अभियुक्त को मृत्युदंड से कम की सजा न दी जाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रदीप कुमार श्रीवास्तव कि दलील थी कि यह केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और ओबैदुर्रहमान मुख्य अभियुक्त नहीं है इसलिए इसे कम से कम सजा दी जाए।
न्यायाधीश ने बहस एवं तर्कों को सुनने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आतंकी आरोपी ओबैदुर्रहमान बाबू उर्फ बाबू भाई निवासी बगुरा बांग्लादेश को आईपीसी की धारा 302/120बी में मृत्युदंड, धारा 307/120बी में 10 वर्ष का सश्रम कारावास एवं पांच लाख रुपये अर्थ दंड, धारा 4 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम में आजीवन कारावास एवं पांच लाख रुपये अर्थ दंड और 14 फारनर्स एक्ट में पांच वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25 हजार रुपये अर्थ दंड की सजा सुनाई।