बिहार में लोकसभा चुनाव में सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए में घमासान के बीच दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महागठबंधन के सहयोगी राजद नेता तेजस्वी यादव की हुई मुलाकात अहम मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो दोनों नेताओं के बीच सीटों को लेकर एक खाका भी खींचा गया है। दोनों ही नेताओं ने भाजपा को हराने के लिए अन्य दलों के लिए भी दरवाजे खुले रखने पर सहमति जताई है। दोनों पार्टियां ऐसे कुछ राजनीतिक क्षत्रपों को भी समर्थन दे सकती हैं जो भाजपा को सीधी टक्कर देने की हैसियत रखता हो।
तेजस्वी ने राज्य में कांग्रेस की दो लोकसभा सीटों के अलावा प्रभाववाली उन सीटों की तलाश को कह दिया है जहां कभी कांग्रेस का दबदबा रहा है। बिहार के जातीय समीकरण में तालमेल बैठाने के लिए भी दोनों दलों के बीच विचार-विमर्श हुआ है। उसी रणनीति के तहत इस महीने के अंत में कांग्रेस बिहार में किसी उच्च जाति के व्यक्ति को प्रदेश अध्यक्ष बना सकती है। दरअसल राजद की अल्पसंख्यकों और पिछड़ी जातियों के बीच बेहतर पैठ है ऐसे में उच्च जातियों के बीच कांग्रेस अपने जनाधार को बढ़ाना चाहती है। कांग्रेस उन्हीं सीटों पर जोर दे रही है जहां उसकी संगठनात्मक मजबूती है।
कांग्रेस-राजद ने बदली राजनीतिक परिस्थिति में महागठबंधन का स्वरूप बदलने और नए सहयोगी की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया है। बिहार कांग्रेस के प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल अपनी चुनावी रणनीति बताने से परहेज कर रहे हैं लेकिन उनका कहना है कि पार्टी राज्य में अपने संगठन की मजबूती में जुटी है। उनका कहना है कि समाज के किसी वर्ग के मतदाता को कांग्रेस को वोट करने में परहेज नहीं है। उन्होंने बताया कि राज्य एआईसीसी के दोनों सचिव इन दिनों दौरे पर हैं। इसके अलावा वे खुद 9 से 11 तक बिहार में रहेंगे। इसी महीने के अंत तक पार्टी बिहार में प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त कर देगी।