अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने बड़ा फैसला लेते हुए कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 से इंजीनियरिंग में ऐसे पारंपरिक पाठ्यक्रमों को अनुमति नहीं दी जाएगी जिनमें रोजगार पाने की संभावना कम होती है। मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने सोमवार को लोकसभा में यह बात कही।
दूसरी ओर, कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि उद्योग क्षेत्र की मांग और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के प्रारूप में कोई भी समानता नहीं है। थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व में दिए गए एक बयान पर चुटकी लेते हुए कहा कि अगर मांग और पाठ्यक्रम में असमानता दूर कर दी जाए तो फिर युवाओं को पकौड़े तलने की सलाह नहीं देनी पड़ेगी।
पोखरियाल ने एक और प्रश्न के उत्तर में कहा कि फिलहाल विदेशों से प्राप्त एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिग्री को मान्यता देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने कहा, 'वर्तमान नीति के अनुसार, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज केवल उन्हीं अनुमोदित या मान्यता प्राप्त विदेशी विश्वविद्यालयों द्वारा दी गई मास्टर डिग्री को मान्यता देता है तो दो साल की अवधि के होते हैं।'
हालांकि, किसी विदेशी विश्वविद्यालय से मिली डिग्री की समकक्षता की समस्याओं को देखने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। समिति ने जो सिफारिशें की थीं वो हर देश की अकादमिक संप्रभुता के लिए परस्पर सम्मान के सिद्धांत पर केंद्रित थीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय नें 550 शिक्षक पद की और 519 गैर शिक्षक पद रिक्त हैं। विश्वविद्यालय ने सभी शिक्षक पद की रिक्तियों के लिए और 32 गैर शिक्षक पद की रिक्तियों के विज्ञापन जारी कर दिए हैं।