प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार पुराने अनुपयोगी कानूनों को हटाने और उनके स्थान पर संक्षिप्त और आसानी से समझ में आने वाले कानूनी प्रावधान लाने के हिमायती रहे हैं। नए इनकम टैक्स बिल में भी केंद्र सरकार की यह सोच साफ दिखाई देती है। नए इनकम टैक्स बिल में आयकर दाताओं को आसानी से समझ में आने वाले शब्दों का उपयोग करते हुए आयकर से जुड़े कानूनों को छोटा करने की कोशिश की गई है।
लेकिन एक आम कर दाता के रूप में आपको यह समझना आवश्यक है कि सरकार ने इस नए इनकम टैक्स बिल को लाने के बाद भी टैक्स दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। यानी आम कर दाताओं को नई टैक्स दर भुगतान विधि या पुरानी टैक्स भुगतान विधि (जैसा कि करदाता ने चुनाव किया हो) उसके अनुसार ही आयकर भरना है।
ईमानदार कर दाता को राहत, चोरी करने वालों को कड़ा दंड
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि एक बात अवश्य समझने वाली है कि सरकार ने ईमानदार करदाताओं की परेशानी को कम करने का काम किया है। अब लोग आसानी से आयकर देने की बातों को समझ सकेंगे और साथ ही उसका समय से भुगतान कर सकेंगे। लेकिन जो लोग गलत जानकारी या आंकड़े देकर आयकर से छूट ले लेते हैं, उन्हें इसकी जानकारी सामने आने पर कड़े दंड देने का प्रावधान भी नए आयकर बिल में किया गया है।
कर चोरी करने वाले करदाताओं को यह समझना होगा कि एआई जैसी तकनीकी के सामने आने से अब लोगों के आंकड़ों की चेकिंग करना और चोरी को पकड़ना बहुत आसान हो गया है। वित्त विभाग के कुछ हिस्से में इसी समय एआई तकनीकी का उपयोग कर लोगों की जानकारियों की समीक्षा की जा रही है और कई लोगों की चोरी पकड़ी भी गई है। ऐसे में अब कर की गणना करते समय लोगों को सही जानकारी देकर उपयुक्त टैक्स चुकाकर सरकार का काम आसान करना चाहिए।
डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि, केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह भी थी कि आयकर से जुड़े मामलों में अदालतों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा था। अदालतों के सामने ईमानदार कर दाताओं को कानूनी पचड़ों से बचाने के साथ-साथ कर चोरी कर रहे लोगों को कड़ा दंड देने का भी विचार था। यही कारण है कि इस आयकर में टैक्स चोरी करने के मामलों में अर्थ दंड की सीमा काफी बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिम के देशों में आर्थिक मामलों को बेहद संजीदगी के साथ देखा जाता है। आयकर चोरी को बहुत गंभीर अपराध के रूप में देखा जाता है। कर चोरी करने वालों को भारी अर्थ दंड चुकाना पड़ता है। नई टैक्स नीति इस मामले में पश्चिम की नकल करती हुई दिखाई दे रही है जहां ईमानदार कर दाताओं को राहत देने की कोशिश की गई है, जबकि कर चोरी करने वालों को कड़ा दंड देने का प्रावधान किया गया है।
नए कानूनों के लिए बार-बार संसद जाने की आवश्यकता नहीं रही
सीबीडीटी को देश के आयकर कानूनों पर समय-समय पर नए प्रावधान देने का अधिकार दिया गया है। अब तक किसी बदलाव के लिए बार-बार उसे संसद से पास कराने की आवश्यकता पड़ती थी, लेकिन अब सीबीडीटी अपने स्तर पर एक ऑर्डर के जरिए नए कानूनी बदलाव कर सकेगी। हालांकि, बाद में इसकी समीक्षा की जा सकेगी। लेकिन तात्कालिक मामलों में सीबीडीटी के अधिकारों को कोई चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
कब होगा लागू
नया इनकम टैक्स बिल संसद में पेश कर दिया गया है, लेकिन अभी यह लागू नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने नए इनकम टैक्स बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजने का सुझाव दिया था। इससे इसमें अन्य दलों-सांसदों के विचारों को समाहित करने में सफलता मिलेगी। अब यह बिल सेलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया है। कमेटी अगले सत्र (मानसून सत्र) के पहले दिन के पहले इसे संसद को सौंपेगी। इसके बाद इसे संसद से पास कर देश में लागू किये जाने का रास्ता साफ होगा।