हिंदुस्तान ने अपना 69वां गणतंत्र दिवस मनाया। ऐसे में 68 साल पहले देश की राजधानी दिल्ली में किस तरह भारत का पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया, इसे याद करना अपने आप में बेहद दिलचस्प है।
उस दिन गणतंत्र दिवस की परेड पुराना किला के सामने ब्रिटिश स्टेडियम में हुई थी। इस जगह आज दिल्ली का चिड़ियाघर हैं और स्टेडियम की जगह पर नेशनल स्टेडियम मौजूद है।
देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने जैसे ही गणतंत्र भारत में पहली बार तिरंगा झण्डा लहराया, इसी के साथ परेड की शुरुआत हो गई। सबसे पहले तोपों की सलामी दी गई जिससे पुराना किला गूंज उठा। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी वहां मौजूद थे, उनके साथ सी राजगोपालाचारी भी थे, वे अंतिम ब्रिटिश वायसरॉय लॉर्ड माउंटबेटन की जगह गवर्नर-जनरल का पद संभाल रहे थे।
राष्ट्रमंडल देशों में शामिल हुआ भारत
गणतंत्र दिवस का अर्थ था कि भारत अपनी जमीन से विदेशी राज के अंतिम निशान मिटाकर गणतंत्र राष्ट्रों की मंडली में शामिल होने जा रहा था। किंग जॉर्ज VI ने भारत को अपनी ओर से शुभकामनाएं भेजी थीं और इसका आभार भी जताया कि नए स्वतंत्र हो रहे देश राष्ट्रमंडल देशों में शामिल होंगे। हालांकि कुछ समय बाद ही किंग का निधन हो गया, भारत में इस शोक समाचार पर श्रद्धांजलि स्वरूप सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की गई थी।
पहले गणतंत्र दिवस के समय ये अफवाहें भी उड़ी थीं कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अपने 'दिल्ली चलो' आह्वान पर एक बार फिर सभी के सामने प्रकट हो सकते हैं।
राजपथ पर नहीं निकली थी परेड
1950 में हुई गणतंत्र दिवस परेड आज की तुलना में उतनी भव्य नहीं थी लेकिन फिर भी वह अपने आप में छाप छोड़ने लायक और भारतवासियों के दिलों में यादगार बनने योग्य तो थी ही।
थल, वायु और जल सेनाओं की कुछ टुकड़ियों ने इस परेड में हिस्सा लिया था, हालांकि उस समय किसी तरह की झाकियां नहीं निकाली गई थीं। जिस तरह मौजूदा वक्त में गणतंत्र दिवस की परेड राजपथ से होते हुए लाल किले तक जाती है, वैसा उस समय नहीं हुआ था। उस वक्त परेड स्टेडियम में ही हुई थी। हवाई करतब दिखाने वाले जहाज़ों में जेट या थंडरबोल्ट शामिल नहीं थे, इनकी जगह डकोटा और स्पिटफायर जैसे छोटे विमानों ने ये किया था।
जनरल फील्ड मार्शल करिअप्पा भारतीय सेनाओं के पहले प्रमुख थे, जिन्हें ब्रिटिश-भारतीय सेना में कई पदक प्रदान किए गए थे।
जवानों की अपनी एक टुकड़ी को उन्होंने फौजी हिंदी में कहा था, ''आज हम भी आजाद, तुम भी आजाद और हमारा कुत्ता भी आजाद''। उनकी आवाज ने वहां जोश का एक अलग ही माहौल पैदा कर दिया था।