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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा सरकार से सवाल- फांसी के अलावा और कैसे दी जाए सजा-ए-मौत 

Tue, 09 Jan 2018 08:39 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : FILE PHOTO
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि दूसरे देशों में सजा-ए-मौत के लिए क्या तरीके अपनाए जाते हैं। शीर्ष अदालत ने यह साफ किया है कि वह यह तय नहीं करेगी कि सजा-ए-मौत के लिए क्या तरीका अपनाया जाना चाहिए।

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने केंद्र सरकार को चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इससे पहले  केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने जवाब दाखिल करने के लिए पीठ से और वक्त देने की गुहार की। सुनवाई के दौरान पिंकी आनंद ने कहा कि फांसी की सजा ही कारगर है। घातक इंजेक्शन देना कारगर नहीं है।

शीर्ष अदालत वकील ऋषि मल्होत्रा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में गुहार की गई है कि फांसी की जगह मौत की सजा के लिए दूसरा विकल्प अपनाया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया कि मृत्युदंड का तरीका सम्मानजनक होना चाहिए। फांसी की प्रक्रिया पूरी होने में 40 मिनट का वक्त लगता है। फांसी की सजा जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में विधि आयोग की 187वीं रिपोर्ट का हवाला दिया गया है जिसमें वर्तमान मौत की सजा के तरीके को हटाने की सिफारिश की गई थी। कई देशों में फांसी की सजा को खत्म कर दिया गया है।
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कई देशों में कम कष्टकारी है मौत की सजा
याचिकाकर्ता ने संविधान की धारा 21 (जीने का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि अभियुक्त को सम्मानजनक मौत पाने का अधिकार है इसलिए उसकी मौत को कम दर्दनाक बनाया जाना चाहिए। कई देशों में फांसी दिए जाने के बजाय बिजली का करंट, गोली या घातक इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन फांसी देने की प्रक्रिया में उसे ज्यादा समय तक कष्ट झेलना पड़ता है।

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