Rashtrapati Bhawan(President House)
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दरबार हॉल नहीं बाहरी प्रांगण में होगा समारोह
शपथ ग्रहण समारोह इस बार राष्ट्रपति भवन के बाहरी प्रांगण में होगा। राज्य के प्रमुखों और देशों के शासनाध्यक्षों के औपचारिक स्वागत के लिए मुख्य द्वार और भवन के बीच एक भव्य रास्ता बनाया जाएगा। यह चौथा मौका होगा जब प्रधानमंत्री पद की शपथ दरबार हॉल की जगह राष्ट्रपति भवन के बाहरी प्रांगण में होगी।
खबरों के अनुसार, सबसे पहले चंद्रशेखर ने 1990 में बाहरी प्रांगण में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 में और इसके बाद 2014 में नरेंद्र मोदी ने बाहरी परिसर में शपथ ग्रहण की थी।
अबतक की सबसे बड़ी मेहमाननवाजी
राष्ट्रपति भवन किसी एक कार्यक्रम के लिए पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए मेहमाननवाजी करने वाला है। मौका है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरी बार शपथ ग्रहण समारोह का। इस कार्यक्रम में 6000 से 6500 लोगों की मौजूदगी रह सकती है।
बाहरी प्रांगण में मेहमानों के बैठने की व्यवस्था होगी। समारोह के बाद रात्रिभोज की व्यवस्था है, जिसमें वेज और नॉनवेज दोनों थालियां होंगी। खाने की सूची में 'दाल रायसीना' को भी जगह दी गई है।
PM with Bollywood Celebrities(File Photo)
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आएंगे 14 देशों के नेता, सेलिब्रेटी लगाएंगे चार चांद
समारोह में 14 देशों के प्रमुख और कई देशों के राजदूतों के अलावा बुद्धिजीवी, राजनीतिक एक्टिविस्ट्स, फिल्म स्टार को बुलाया गया है। वहीं राजनीतिक दलों के प्रमुखों और कई वरिष्ठ राजनेताओं को भी समारोह में बुलाया गया है।
इस बार भाजपा, टीएमसी समेत कई दलों से सांसद के तौर पर बॉलीवुड, टॉलीवुड के अलावे क्रिकेट और अन्य खेल जगत के सितारों से सजने वाला है। फिल्मों से राजनीति में आए साउथ सिनेमा के सुपरस्टार रजनीकांत और कमल हासन को भी न्योता मिला है। कहा जा रहा है कि ऐसे में शपथग्रहण समारोह में इनके आने से आयोजन में चार चांद लग जाएंगे।
...When Amit Shah Rally in west Bengal postponed
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बंगाल हिंसा में मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों को भी न्योता
समारोह में जहां बड़ी-बड़ी हस्तियों को न्योता दिया गया है वहीं पार्टी ने पश्चिम बंगाल हिंसा में मारे गए भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवार वालों को विशेष रूप से बुलावा भेजा है। इन लोगों के रहने-ठहरने की सारी व्यवस्था भी पार्टी ने की है।
54 परिवारों को दिए गए इस न्योते को बंगाल में पैर पसारने की कोशिश कर रही भाजपा का अहम कदम माना जा रहा है। निमंत्रण सूची में 16 जून 2013 से 26 मई 2019 तक जितने कार्यकर्ता राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए हैं, उनके परिवार वालों को न्योता दिया गया है।