साल 1990 था। महाराष्ट्र पुलिस बल में एक सब-इंस्पेक्टर शामिल हुआ। नाम था सचिन वाजे। पहली पोस्टिंग गढ़चिरौली के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में हुई, लेकिन दो साल बाद ठाणे शहर पुलिस में शिफ्ट कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक, सचिन वाजे ने 63 से ज्यादा एनकाउंटर किए, लेकिन उनकी वर्दी पर एक भी दाग नहीं लगा। जब मुन्ना नेपाली जैसे कुख्यात गैंगस्टर को ठिकाने लगाया तो उनकी शोहरत बुलंदियों पर पहुंच गई। कहा जाता है कि कई साल तक ठाणे में पोस्टिंग के कारण स्थानीय पत्रकारों के बीच वह काफी मशहूर हो गए। इसके अलावा नेतानगरी में भी उनकी पकड़ मजबूत होती चली गई।
सूत्र बताते हैं कि प्रदीप शर्मा ही सचिन वाजे को क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट यानी सीआईयू में लाए थे। उस वक्त प्रदीप शर्मा सीआईयू के इंचार्ज थे। पत्रकारों से उनकी काफी अच्छी बनती थी। कहा जाता है कि एक पत्रकार के कहने पर ही सचिन वाजे को क्राइम ब्रांच में पोस्टिंग मिली थी। इसके बाद सचिन प्रदीप शर्मा के बेहद करीब हो गए, लेकिन उनकी टीम में शामिल दया नायक से सचिन का कॉम्पिटिशन शुरू हो गया। मुंबई क्राइम ब्रांच में एक दौर ऐसा भी रहा, जब दया और सचिन में एनकाउंटर करने की होड़ शुरू हो गई थी।
मुंबई में सचिन वाजे का सितारा एकदम बुलंदी पर था, लेकिन एक केस ने उनकी पूरी जिंदगी पलट दी। दरअसल, 2 दिसंबर 2002 को घाटकोपर रेलवे स्टेशन पर एक धमाका हुआ। इसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मुंबई पुलिस के तत्कालिक कमिश्नर एमएन सिंह ने सचिन वाजे को जांच टीम में शामिल किया तो उन्होंने डॉ. मतीन, मुजम्मिल, जहीर और ख्वाजा यूनुस को गिरफ्तार कर लिया। सचिन वाजे का कहना था कि मुंबई से औरंगाबाद जाते वक्त ख्वाजा यूनुस फरार हो गया। हालांकि, डॉ. मतीन ने बयान दिया कि यूनुस को लॉकअप में बुरी तरह पीटा गया, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में यूनुस की मां ने वाजे समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ अदालत के माध्यम से केस दर्ज कराया, जिसमें वाजे को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच के दौरान वाजे को सस्पेंड कर दिया गया। यह मामला आज भी अदालत में लंबित है।
बता दें कि सस्पेंड होने के बाद सचिन वाजे ने डिजीनेक्स्ट मल्टीमीडिया, मल्टीबिल्ड इंफ्राप्रोजेक्ट्स और टेक लीगल सॉल्यूशन नाम की तीन आईटी कंपनी बनाईं। इनमें दो कंपनियों को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने बंद कर दिया, जबकि डिजीनेक्स्ट मल्टीमीडिया चल रही है। कहा जाता है कि सचिन ने इसी कंपनी से काफी पैसा बनाया। वह अब भी इसके डायरेक्टर हैं।
सचिन वाजे का करियर भले ही अब ढलान पर पहुंचता लग रहा है, लेकिन एक वक्त वह महाराष्ट्र की सबसे ताकतवर शख्सियत यानी बाला साहब ठाकरे के बेहद करीब होते थे। जब सचिन शिवसेना में शामिल हुए तो पार्टी के अंदरूनी लोगों को इस पर बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं था। दरअसल, बाला साहब ठाकरे सार्वजनिक रूप से कई बार सचिन की सराहना कर चुके थे। बता दें कि 3 मार्च 2004 को अदालत के आदेश पर जब सचिन वाजे को सस्पेंड किया गया तो वह कई साल तक शिवसेना के पार्टी प्रवक्ता के रूप में काम करते रहे। हालांकि, शिवसेना के नेता अब कहते हैं कि वह कभी पार्टी में सक्रिय नहीं रहे। सूत्रों का कहना है कि नौकरी से सस्पेंड होने के बाद सचिन को दो बार यानी 2005 और 2007 में दोबारा पुलिस डिपार्टमेंट में लाने का प्रयास किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी यह आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि सचिन वाजे को बहाल करने के लिए शिवसेना के नेता लगातार दबाव बनाते थे।
जानकारी के मुताबिक, सचिन वाजे को 7 जून 2020 को मुंबई पुलिस में वापस रखने का फैसला एक रिव्यू कमेटी ने लिया। उस दौरान कहा गया कि कोविड की वजह से मुंबई पुलिस को ज्यादा पुलिसकर्मियों की जरूरत है। इस रिव्यू कमेटी के प्रमुख परमबीर सिंह थे। इसके बाद वाजे की पहली पोस्टिंग नयागांव पुलिस हेडक्वॉर्टर में हुई। वहीं, कुछ ही दिन बाद उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस शाखा भेज दिया गया। यहां आने पर उन्हें टीआरपी केस, अन्वय नाइक आत्महत्या मामला, स्पोर्ट्स कार घोटाले में दिलीप छाबड़िया का केस और बॉलीवुड टीवी इंडस्ट्री का कास्टिंग काउच रैकेट का केस सौंप दिया गया।
एनआई सूत्रों के मुताबिक, सचिन वाजे 25 फरवरी 2021 को कारमाइकल रोड पर यानी मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के पास विस्फोटकों से भरी स्कॉर्पियो को खड़ी करने वाले लोगों में शामिल होने का आरोप हैं। सूत्रों का दावा है कि इस मामले में वाजे अपनी भूमिका भी स्वीकार कर चुके हैं। हालांकि, इस मामले में एनआईए की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया है। इसके अलावा स्कॉर्पियो मालिक मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में भी सचिन वाजे का नाम जुड़ गया है। दरअसल, मनसुख की पत्नी ने अपने पति की हत्या के पीछे सचिन वाजे का हाथ होने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि सचिन वाजे महाराष्ट्र के कोल्हापुर में पैदा हुए थे। साल 1990 से पहले तक वह इसी शहर में पले-बड़े। शहर के पुराने शिवाजी पैठ इलाके में उनका पुश्तैनी मकान है, जिस पर अक्सर ताला लटका रहता है। पड़ोसियों का कहना है कि सचिन वाजे आखिरी बार करीब 20 साल पहले कोल्हापुर आए थे।