चंडीगढ़ की एक निजी यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में छात्राओं के आपत्तिजनक वीडियो बनाने के मामले में चल रहा विरोध प्रदर्शन रविवार देर रात खत्म हो गया। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर छात्रों की मांगे मानने के बाद ये प्रदर्शन खत्म हुआ। इससे पहले आरोपी छात्रा को रविवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। प्रदर्शन भले खत्म हो गया है, लेकिन इस मामले में साइबर कानूनों और साइबर सुरक्षा के कई पहलुओं पर फिर से बहस छेड़ दी है।
आखिर किन धाराओं में आरोपी छात्रा को गिरफ्तार किया गया है? ये धाराएं किस तरह के आरोप पर लगती हैं? जांच के बाद क्या आरोपी लड़की पर धाराएं बढ़ सकती हैं? अगर आरोपी लड़की पर दबाव डालकर ये वीडियो बनवाए गए हों तो मामले में क्या होगा? जानिए इन सभी सवालों के जवाब सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता से…
किन धाराओं में आरोपी छात्रा को गिरफ्तार किया गया है?
आरोपी छात्रा को पुलिस ने रविवार को ही गिरफ्तार किया। आरोपी खुद उसी यूनिवर्सिटी में एमबीए की छात्रा है। इस मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 354-C और आई टी एक्ट की धारा 66 E के तहत एफआईआर दर्ज की है। ये धाराएं लड़की या महिला को गलत तरीके से और छिप कर फिल्माने पर लगाई जाती है।
क्या ये अश्लील वीडियो कारोबार का मामला हो सकता है?
आरोपी लड़की बाथरूम में दूसरी लड़कियों का वीडियो बना रही थी, यह बात प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई है। ये बात सामने आने के बाद ही इस मामले ने तूल पकड़ा। दावा किया जा रहा है कि आरोपी लड़की के फोन से आपत्तिजनक वीडियो मिले भी हैं। हालांकि, इस बात के प्रमाण आरोपी लड़की के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच के बाद ही सामने आएंगे। अगर यह बात सही निकली तो फिर इस बात की जांच करनी होगी कि क्या इन सब के पीछे अश्लील वीडियो के कारोबार के भी कनेक्शन जुड़े हुए हैं या नहीं। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
आरोपी लड़की के मोबाइल से पुलिस ने आपत्तिजनक वीडियो डिलीट कर दिए, ऐसे में फॉरेंसिक जांच कैसे होगी?
खबरों के मुताबिक आरोपी लड़की और लड़कों ने चैट और वीडियो डिलीट कर दिए गए हैं। इन्हें दोबारा वापस देखने और फॉरेंसिक जांच के साथ व्हॉट्सएप कंपनी की भी मदद लेनी पड़ सकती है। इस बारे में पुलिस को भारत स्थित शिकायत अधिकारी से मदद मिलेगी लेनी होगी। व्हॉट्सएप एक विदेशी कंपनी है इसलिए चंडीगढ़ पुलिस को केंद्रीय गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के माध्यम से आवेदन भेजना होगा। इसकी वजह से मामले की जांच और आरोप पत्र में देरी हो सकती है।
क्या इस मामले में पॉक्सो कानून की धाराएं भी लग सकती हैं?
चंडीगढ़ से पहले डीपीएस और दूसरे कई एमएमएस के मामले सामने आ चुके हैं। उनमें से कई मामले ऐसे थे जो बच्चों से जुड़े हुए थे। बच्चों जुड़े मामलों में ही पॉक्सो कानून लगाया गया। जहां तक इस मामले की बात है तो इसमें दोनों आरोपी युवक और यूनिवर्सिटी की छात्राएं वयस्क हैं। इसलिए इसमें पॉक्सो कानून के तहत फिलहाल मामला दर्ज होने की संभावना नहीं दिखाई देती है।
आरोपियों को कितनी सजा हो सकती है?
पुलिस जांच के बाद काफी चीजें साफ होंगी। अगर पुलिस और फॉरेंसिक जांच के बाद यह सामने आता है कि आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किए गए। उन्हें सिर्फ व्हॉट्सएप पर ही एक आरोपी ने दूसरे को भेजा तो फिर इसमें अपराध की धाराएं कमजोर हो जाएंगी। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को अश्लील वीडियो भेजे जाएं और उनका सार्वजनिक प्रदर्शन नहीं हो तो फिर आरोपी व्यक्तियों को कठोर सजा दिलाना मुश्किल हो सकता है।
पुलिस ने अभी आरोपियों को 66E और 354-C के तहत मामला दर्ज किया है। 66E का दोषी पाए जाने पर आरोपी को दो लाख तक का जुर्माना या तीन साल तक की सजा हो सकती है। वहीं, 354-C का दोषी पाए जाने पर आरोपी को जुर्माना और एक से पांच साल तक की सजा हो सकती है।
प्राइवेसी उल्लंघन का मामला भी तो है, उसका क्या?
इस मामले में फिलहाल जिस लड़की ने वीडियो बनाया है उसके खिलाफ सहमति के बगैर अश्लील वीडियो बनाने का आरोप जाहिर होता है। इसमें प्राइवेसी के उल्लंघन का भी मामला बनता है, लेकिन भारत में अभी तक प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा के लिए संसद से कानून नहीं बनने से आरोपियों को सजा दिलाने में मुश्किल हो सकती है।
अगर आरोपी लड़की पर दबाव डालकर ये वीडियो बनवाए गए हों तो मामले में क्या होगा?
अभी इस मामले में यूनिवर्सिटी की छात्रा ही मुख्य आरोपी है। उसके ऊपर वीडियो बनाने के आरोप हैं। हालांकि, अगर पूछताछ के बाद यह बात सामने आई कि उस लड़की के ऊपर दबाव था या उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था, तो मामला बदल जाएगा। इस स्थिति में आरोपी लड़की को पीड़िता मानते हुए मामले में नए सिरे से आरोपी लड़कों और उनके गैंग के खिलाफ एफआईआर दर्ज करनी होगी। इसके बाद पुलिस इस बात का भी पता लगा सकती है कि क्या इस मामले के तार नशीले कारोबार और साइबर अपराध के दूसरे रैकेट से भी जुड़े हैं या नहीं? उसके लिए दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ भी समन्वय में करके तेजी से जांच की जाए तो फिर सच के साथ साइबर अपराधियों का नेटवर्क उजागर होगा।