यूपी में योगी आदित्यनाथ को गद्दीनशीं हुए अभी एक महीना ही हुआ है। इस एक महीने में तमीज और तहजीब के शहर लखनऊ के बदले माहौल का आंखों देखा हाल सुनिए -
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परिदृश्य एक- पुराने लखनऊ का अति व्यस्त और संकरा इलाका नादान महल रोड। मौका एक कपड़े के शो रुम के उद्घाटन का है। राज्य के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक रेड रिबन काट रहे हैं। तालियां बजती हैं और मंत्री जी का शो रुम में पदार्पण होता है। मंत्री जी बटुआ निकालते हैं और अपने बेटे के लिए दो टी शर्ट खरीदते हैं। दुकानदार मिन्नतें करता है कि मंत्री जी दुकान आपकी है पैसा क्यों दे रहे हैं।
वहां मौजूद सैकड़ों लोग स्तब्ध हैं। और हैरान हो भी क्यों ना। ये वही लखनऊ है जहां इससे पहले एक अदना सा थानेदार भी अपने इलाकों की दुकानों को अपनी जागीर समझता रहा है। अब एक दूसरे मंत्री का हाव भाव देखें। कार्यभार संभालने दफ्तर पहुंचे मंत्री उपेन्द्र तिवारी, साफ सफाई के लिए खुद ही झाड़ू उठाकर शुरु हो जाते हैं। आसपास खड़े अधिकारी अटेंशन मुद्रा में तिरछी आंखों से एक दूसरे को देख रहे हैं।
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रंग बिरंगी बाइक सवारों के उड़े होश
परिदृश्य दो- हजरतगंज के आखिरी छोर से सटा चाइना बाजार गेट और इंदिरापुरम का भूतनाथ इलाका। इन इलाकों में कभी चमकदार रंग बिरंगी बाइक सवारों का हुजूम नजर आता था। अब वो लगभग गायब हैं। इन दो इलाकों के साथ ही पत्रकार पुरम इलाके की शराब की दुकानों के इर्द गिर्द भी भीड़ नहीं दिखती। ये भीड़ कभी आम लोगों की आवाजाही और रास्ते से गुजरती लड़कियां-महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बना करती थी।
लेकिन लोगों को अब राहत है क्योंकि योगी राज में पुलिस भी एक्टिव हो चली है। नवाबों के शहर लखनऊ के लिए बदनुमा दाग बन चुका 'कार-ओ-बार' कल्चर भी बीते दिनों की बात हो गई है। शराब की दुकानों के आसपास प्लास्टिक के गिलास, ठंडा मिनरल वाटर और आइस क्यूब बेचनेवाले का धंधा ठप हो गया है। क्योंकि बीच सड़क कार में पीने पिलाने की सांस योगी राज में उखड़ चुकी है।
परिदृश्य तीन- राजधानी का सचिवालय। सेक्रेटेरिएट की गलियारों की दीवारें साफ सुथरी नजर आने लगी है। दरअसल सचिवालय एनेक्सी में दीवारों पर पान, गुटखों की पीकों से नाराज योगी ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। नतीजा अब सचिवालय पान गुटखा और तंबाकू के बदरंग धब्बों से आजाद नजर आने लगा है। सीएम योगी ने सचिवालय सहित सभी सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और स्कूल कॉलेजों में पान गुटखा खाने पर पाबंदी लगा दी है।
बूचड़खानों पर पाबंदी और एंटी-रोमियो स्कॉएड का गठन
परिदृश्य चार- बीजेपी के एक वरिष्ठ सांसद और दो विधायक सीएम योगी से मिलने पहुंचते हैं। वो अपने अपने इलाके में पसंदीदा अफसरों की तैनाती की वकालत करते हैं। योगी दो टूक उनसे कहते हैं-आप इन मसलों में ना पड़े। और इन मुद्दों पर चर्चा करना बंद कर दें। लगे हाथ योगी ये संदेश भी दोहरा देते हैं कि बीजेपी नेता और कार्यकर्ता सरकारी ठेकेदारी से बचें।
इन सबके साथ योगी आदित्यनाथ ने बूचड़खानों पर पाबंदी और एंटी-रोमियो स्कॉएड के गठन जैसे फैसले भी लिए हैं जिनकी काफी आलोचना हो रही है। लेकिन इन फैसलों के समर्थक भी कम नहीं हैं। बूचड़खानों पर पाबंदी को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल) के फैसलों से जोड़कर भी कुछ लोग देख रहे हैं। वहीं एंटी-रोमियो स्कॉएड के गठन से महिलाओं के साथ छेड़खानी की घटनाएं भी काफी कम हो गईं हैं।
अब चलते हैं विरोधी खेमे की ओर यहाँ का नजारा अजीबो गरीब है। यूपी की सत्ता का दशकों तक केन्द्र रहा विक्रमादित्य मार्ग आज सुनसान है। इस रोड पर मुलायम-अखिलेश के आवास के अलावा समाजवादी पार्टी का दफ्तर और लोहिया संस्थान भी है। खादी-खाकी के जमावड़े के बीच सुरक्षा जांच पड़ताल और सियासी भागदौड़ अब बीते दिनों की बात हो गई है।
मुख्यमंत्री निवास पर भगवाधारी और बुर्कानशीं महिलाएं
इस मार्ग पर अब ना सियासी शोर है और ना ही रैलियों का रेला। लिहाजा इलाके में रहनेवाले रेलवे के बड़े अधिकारी सहित उनके परिजन राहत महसूस कर रहे हैं। ऐसी ही खामोशी माल एवेन्यू स्थित कांग्रेस कार्यालय और बीएसपी प्रमुख मायावती के आवास पर भी चस्पी है। कालिदास मार्ग का नजारा अलग है। मुख्यमंत्री निवास होने की वजह से ये पहले भी गुलजार था और आज भी है।
फर्क सिर्फ यहां आंगतुकों में दिखता है। अब यहां साधु संतों और भगवाधारी बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ अच्छी खासी तादाद में बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएं नजर आती हैं। जो अपनी-अपनी फरियाद लेकर सीएम योगी के दरबार में पहुंचती हैं।
अब सवाल है कि योगी राज में दिख रहा ये बदलाव महज सतही है? क्योंकि लखनऊ के सियासी तौर तरीकों को नजदीक से देखने समझनेवाले भौंचक हैं। वर्ना यहां तो सत्तारुढ़ दल के छुटभैया नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक पर सत्ता का रुआब सिर चढ़कर बोलता रहा है। रातों रात इनकी रंगत बदलती देखी गई है।
महंगे कपड़े, चमकदार गाड़ियों के साथ इन्हें मलाईदार सरकारी ठेकों का सरताज बनते देखा गया है। लेकिन, फिलहाल ऐसा नहीं दिखता। योगी की कथनी और करनी को समझनेवाले तो ये कहकर चुटकी ले रहे हैं कि, योगी राज में बीजेपी के कार्यकर्ता ही कहीं कुपोषण के शिकार ना हो जाएं। योगी राज में बदलाव की बयार हर ओर महसूस की जा रही है।
मंत्री संतरी से लेकर आम सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक बदलाव हावी दिख रहा है। चाहे वो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम की हो। या फिर, अपनी लेट लतीफी के लिए कुख्यात सरकारी कर्मचारियों को समय पाबंद बनाने की शुरु हुई कवायद। लगता है 'पूरे राज्य को बदल डालूंगा' की मुहिम में योगी सरकार जुटी है।
महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर स्कूल-कॉलेजों में होनेवाली छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। वहीं प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में पोस्टग्रेजुएशन एडमिशन में आरक्षण कोटा खत्म कर दिया है। हालांकि योगी सरकार के लोक लुभावन बदलाव के बीच कई और सवाल मौजूं हैं। मसलन क्या लखनऊ की बदलती तस्वीर 2019 आम चुनाव के पोट्रेट का हिस्सा है?