इंटरपोल के पास आठ तहर के नोटिस जारी करने का अधिकार है। इसके ये नोटिस अपने रंगों से पहचाने जाते हैं और सूचना के आदान प्रदान की प्रक्रिया की तहत इस्तेमाल किए जाते हैं। जब संस्था का कोई सदस्य देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग का आवेदन करता है तो नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के आग्रह पर इंटरपोल का जनरल सेक्रेटरी नोटिस जारी करता है।
कई बार हम लाल नोटिल, नीला नोटिस आदि के बारे में सुनते हैं लेकिन इनका मतलब समझने में दिक्कत भी होती है। तो चलिए आपको इन विभिन्न प्रकार के नोटिस के बारे में बताते हैं जो कि अपने रंगों से जाने जाते हैं-
- लाल नोटिस
लाल नोटिस किसी अपराधी को गिरफ्तार करने और उसके प्रत्यपर्ण के लिए जारी होता है। हाल ही में नीरव मोदी के सहयोगी मिहिर भंसाली की भारत में वापसी कराने के लिए इंटरपोल ने रेड कार्नर नोटिस यानि लाल नोटिस जारी किया है। संस्था ने अपने सभी सदस्य देशों से उसे गिरफ्तार करने को कहा है।
- नीला नोटिस
नीले नोटिस को किसी व्यक्ति के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या फिर पाने के लिए जारी किया जाता है।
- हरा नोटिस
कई बार अपराधी एक देश में अपराध कर दूसरे देशों में भाग जाते हैं और उस देश में भी अपराध करने लगते हैं। तो ऐसे लोगों को गिरफ्तार करने के लिए हरे नोटिस को जारी किया जाता है। हरे नोटिस के जरिए ऐसे व्यक्ति के बारे में चेतावनी दी जाती है कि वह एक देश में तो अपराध कर चुका है और आशंका है कि दूसरे देश में जाकर भी अपराध कर सकता है।
- पीला नोटिस
कई बार बच्चों या महिलाओं का अपहरण कर या तस्करी कर उन्हें दूसरे देशों में भेजा जाता है। ऐसे लापता लोगों के बारे में सूचनाएं देने के लिए पीले नोटिस को जारी किया जाता है।
- काला नोटिस
काला नोटिस किसी लाश की शिनाख्त न होने पर जारी किया जाता है।
- नारंगी नोटिस
नारंगी नोटिस बमों, पार्सल बमों आदि के बारे में सूचना देने के लिए जारी किया जाता है।
- बैंगनी नोटिस
यह नोटिस अपराधियों द्वारा बचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीकों के लिए जारी किया जाता है।
इंटरपोल मुख्य रूप से तीन अपराधों के लिए अपनी पुलिस क्षमताओं का इस्तेमाल करती है। इनमें पहला है काउंटर आतंकवाद, दूसरा है साइबर अपराध और तीसरा है संगठित अपराध। भारत 69 साल पहले यानि 1949 में इसका सदस्य बना था। इसका सालाना बजट 942 करोड़ रुपये है। इसकी शुरुआत 1923 में हुई थी।
20 देशों की सदस्यता से शुरू हुआ था इंटरपोल
जब इंटरपोल की स्थापना हुई तब इसके केवल 20 देश ही सदस्य थे। इसकी शुरुआत प्रथम विश्व युद्ध के बाद की गई। उस समय अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही थी और अपराधी भी बचने के लिए दूसरे देशों की शरण लेने लगे। जिसके बाद ऑस्ट्रिया के वियना में पुलिस अधिकारियों की एक बैठक हुई और 20 देशों ने इसकी स्थापना की। इंटरपोल का संविधान 1956 में बनाया गया।