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Budget: टैरिफ वार से कैसे निपटेगा भारत? बजट में बड़े आर्थिक सुधारों का रोडमैप तैयार, नहीं थमेगी देश की रफ्तार

Mon, 12 Jan 2026 05:48 AM IST
हिमांशु मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिका के टैरिफ वार से बने वैश्विक दबाव के बीच भारत आम बजट में बड़े आर्थिक सुधारों की तैयारी कर रहा है। सरकार सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और बुनियादी ढांचे पर फोकस करेगी। ऐसे में आइए जानते हैं कि देश के लिए सुधारों की रफ्तार बढ़ाना क्यों जरूरी है?
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निर्मला सीतारमण - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिका के टैरिफ वार से वैश्विक अर्थव्यवस्था में बनी अनिश्चितता के बीच भारत नए साल में बड़े आर्थिक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। इसकी झलक एक फरवरी को पेश होने वाले आम बजट में देखने को मिलेगी। सरकार की रणनीति उच्च विकास दर बनाए रखने, निर्यात बढ़ाने और निवेश के नए अवसर तैयार करने पर केंद्रित है। बदलते वैश्विक हालात में भारत खुद को मजबूत आर्थिक विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है।
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सरकार आम बजट के जरिए सेवा क्षेत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, अंतरिक्ष और स्वास्थ्य सेवा जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े सुधारों की घोषणा कर सकती है। इन क्षेत्रों को रोजगार सृजन और दीर्घकालिक विकास की रीढ़ माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।

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वैश्विक समझौते क्यों हैं अहम?
सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत नए साल में कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौता, प्राथमिकता व्यापार समझौता और द्विपक्षीय निवेश संधि को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। संभावना है कि इसी महीने यूरोपियन यूनियन के साथ एफटीए और मार्च तक Israel के साथ बीआईटी को अंतिम रूप दिया जाए। अमेरिकी बाजार में संभावित नुकसान की भरपाई के लिए भारत नए बाजारों की तलाश में पहले से जुटा हुआ है।

किन क्षेत्रों पर रहेगा खास जोर?
  • सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बढ़ाने की योजना।
  • 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य।
  • डिजिटल और अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की तैयारी।
  • बुनियादी ढांचे को तेज गति से मजबूत करने पर फोकस।
  • स्वास्थ्य सेवा को किफायती और सुलभ बनाने की पहल।
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सेमीकंडक्टर पर दांव क्यों अहम?
सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में चिप निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है। लक्ष्य इसी साल 55 अरब डॉलर के संभावित बाजार में भारत की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना है। माना जा रहा है कि चिप निर्माण में आत्मनिर्भरता से भारत तकनीकी और रणनीतिक रूप से मजबूत होगा।
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सुधारों की रफ्तार बढ़ाना क्यों जरूरी?
मोदी सरकार के कार्यकाल में जीएसटी और नए श्रम कानून जैसे बड़े सुधार लागू हुए, लेकिन भूमि अधिग्रहण कानून और तीन कृषि कानून राजनीतिक कारणों से आगे नहीं बढ़ सके। अब सरकार का मानना है कि वैश्विक आर्थिक दबाव और कूटनीतिक बदलावों के चलते सुधारों की रफ्तार बढ़ाना जरूरी हो गया है। बदलते हालात में भारत को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए साहसिक फैसले अनिवार्य माने जा रहे हैं।


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