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देश को सेवा देने वाले की विधवा से कैसे वसूली कर सकती है सरकार: हाईकोर्ट

Sun, 10 Jun 2018 04:25 AM IST
विवेक शर्मा, चंडीगढ़
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high court
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इंडियन रॉयल आर्मी में सेवा दे चुके व्यक्ति की विधवा को दी गई अतिरिक्त पेंशन की वसूली का नोटिस हरियाणा सरकार को भारी पड़ गया। हाईकोर्ट ने कहा कि रॉयल इंडियन आर्मी में सेवा दे चुके व्यक्ति की विधवा से वसूली के बारे में सरकार सोच भी कैसे सकती है जबकि कर्मचारियों को अतिरिक्त भुगतान की वसूली का प्रावधान नहीं है। हाईकोर्ट ने वसूली की प्रक्रिया को खारिज करने के साथ ही हरियाणा सरकार को फटकार लगाई और दो माह में याचिका खर्च के रूप में 25 हजार भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए कुरुक्षेत्र निवासी कृष्णा देवी ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को बताया कि उसे 300 रुपये वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। ब्रिटिश शासन में इंडियन रॉयल आर्मी में सेवा कर चुके उनके पति की 29 जुलाई 2008 को मौत हो गई। इसके बाद याची को फैमिली पेंशन मिलने लगी, उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि फैमिली पेंशन के साथ वृद्धावस्था पेंशन नहीं ली जा सकती। जनवरी 2015 में हरियाणा सरकार ने उसकी वृद्धावस्था पेंशन बंद कर दी और उसे 63,982 रुपये की रिकवरी का नोटिस जारी कर दिया। मूल राशि 44,650 थी जिस पर 12 प्रतिशत ब्याज लगाकर रिकवरी राशि तय की गई।

बुढ़ापे व कम जागरूकता से महिला को नहीं थी जानकारी

हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए अपने आदेश में कहा कि जब याची को वृद्धावस्था पेंशन मिलती थी तो वह इसके योग्य थी। बुढ़ापे और कम जागरूकता के कारण उसे यह जानकारी नहीं थी कि वह दोनों पेंशन साथ नहीं ले सकती, ऐसे में वह दोषी नहीं है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने रिकवरी को लेकर कहा कि हरियाणा सरकार की कर्मचारियों से रिकवरी को लेकर दिसंबर 2016 के निर्देशानुसार इक्विटेबल (न्यायसंगत) बैलेंस बनाए रखने की नीति है। ऐसे में एक सीनियर सिटीजन और रॉयल इंडियन आर्मी में सेवाएं दे चुके व्यक्ति की विधवा से वसूली नहीं बनती।
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सरकार की लापरवाही से कोर्ट आने पर मजबूर

कोर्ट ने सरकार व रिकवरी आदेश जारी करने वाले अधिकारी को फटकार लगाते हुए कहा कि अधिकारियों के संवेदनहीन रवैये के कारण ही वरिष्ठ नागरिक को कोर्ट में दस्तक देने को मजबूर होना पड़ा। ऐसे में राज्य सरकार को दो माह के भीतर 25 हजार का भुगतान सीधे याची के खाते में ट्रांसफर करना होगा।
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