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Aditya-L1: इसरो का आदित्य एल1 कैसा कर रहा काम; उसके लिए लेनी होगी यूरोपीय एजेंसी की मदद, जानें कैसे

Sat, 02 Sep 2023 04:14 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इसरो ने चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद शनिवार को आदित्य एल1 की सफल लॉन्चिंग कर दी है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) का पहला सौर मिशन है।
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सूर्य के रहस्यों का पता लगाने निकला आदित्य एल1 - फोटो : iStock
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विस्तार
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इसरो ने चंद्रयान-3 की कामयाबी के बाद शनिवार को आदित्य एल1 की सफल लॉन्चिंग कर दी है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान (इसरो) का पहला सौर मिशन है। वहीं, भारत का इस मिशन में यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) भी सहयोग कर रही है। गहरे अंतरिक्ष संचार सेवाओं की गतिविधि जानने के लिए ईएसए की मदद लेनी होगी।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, जब अंतरिक्ष यान गहरे अंतरिक्ष में प्रवेश करता है तो इसके सिग्नल की काफी दिक्कतें आती हैं। उन्हीं से निजात पाने के लिए अन्य विदेशी स्पेस एजेंसियों की मदद लेनी पड़ती है। भारत भी इस काम के लिए यूरोपियन स्पेस एजेंसी की सहायता ले रहा है, जो अंतरिक्ष में इसरो का मिशन आदित्य एल1 की मदद करेगा।

संचार प्रत्येक अंतरिक्ष मिशन का एक अनिवार्य हिस्सा है। ईएसए ने कहा कि ग्राउंड स्टेशन सपोर्ट के बिना, अंतरिक्ष यान से कोई भी विज्ञान डेटा प्राप्त करना, यह जानना कि यह कैसा काम कर रहा है, यह जानना कि यह सुरक्षित है या यहां तक कि यह कहां है, असंभव है। 
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इसरो के ईएसए सेवा प्रबंधक और ईएसए क्रॉस-सपोर्ट संपर्क अधिकारी रमेश चेल्लाथुराई ने कहा कि ईएसए के गहरे अंतरिक्ष ट्रैकिंग स्टेशनों का वैश्विक नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त तकनीकी मानकों का उपयोग, हमें अपने भागीदारों को सौर मंडल में लगभग कहीं भी उनके अंतरिक्ष यान से डेटा को ट्रैक करने, कमांड करने और प्राप्त करने में मदद करने की अनुमति देता है।

ईएसए ने कहा कि वह आदित्य-एल1 के लिए ग्राउंड स्टेशन सेवाओं का मुख्य प्रदाता भी है। अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि ईएसए स्टेशन शुरू से अंत तक मिशन का सपोर्ट कर रहे हैं। अन्य स्पेस एजेंसी से कहीं ज्यादा यूरोपियन स्पेस एजेंसी आदित्य -एल1 को सपोर्ट कर रही है। ईएसए ने कहा कि वे इस मिशन की लॉचिंग से लेकर मिशन के एल-1 प्वाइंट पर पहुंचने तक सपोर्ट करेगी। जानकारी के मुताबिक, आदित्य एल1 को अगले दो साल तक यूरोपियन स्पेस एजेंसी कमांड भेजने में इसरो की मदद करेगी।

सूरज की सतह पर छिपे हुए राज को खंगालने के लिए श्रीहरिकोटा से आदित्य एल1 शनिवार को रवाना हो गया। तकरीबन 4 महीने के बाद सूरज के जिस लैंग्रेजियन पॉइंट में आदित्य एल वन पहुंचेगा वहां से अगले तकरीबन 25 साल तक यह हमारे वैज्ञानिकों को सूचनाओं भेजता रहेगा। हालांकि आदित्य एल वन की उम्र तो वैसे पांच साल की ही है। लेकिन जिन तकनीकियों के इस्तेमाल से उसको भेजा गया है वह कम से कम 25 साल से ज्यादा तक सूर्य के से रहस्यों को खंगालता रहेगा। 

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