नेपाल के रासुवा इलाके में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। इसमें 475 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से ज्यादा लोग लापता हैं। प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है, जो ट्रेकिंग, गाइडेड टूर या पवित्र हिंदू तीर्थस्थल की यात्रा के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे।
इसके बाद सवाल उठा कि जब नेपाल में बाढ़ और मौसम से जुड़ी आपदाओं की निगरानी के लिए कई व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो इतनी तेजी से आई बाढ़ में लोगों को बचने के लिए पर्याप्त समय क्यों नहीं मिल पाया। इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि नेपाल के पास कौन-कौन से निगरानी और चेतावनी तंत्र हैं? वे किस तरह काम करते हैं? कहां कमी रह गई? क्या चुनौतियां मौजूद हैं? रासुवा की बाढ़ किस तरह अलग थी?
नेपाल के पास बाढ़ की चेतावनी के लिए कौन-कौन से सिस्टम हैं?
नेपाल के जल व मौसम विज्ञान विभाग के पास बाढ़, मौसम और हिमालयी क्षेत्रों से जुड़े खतरों की निगरानी के लिए कई व्यवस्थाएं हैं। विभाग जल और मौसम से जुड़े आंकड़े जुटाने, उनका विश्लेषण करने और खराब मौसम व जल संबंधी घटनाओं की जानकारी लोगों और संबंधित एजेंसियों तक पहुंचाने का काम करता है। मानसून के दौरान बाढ़ का पूर्वानुमान और शुरुआती चेतावनी भी जारी की जाती है।
नदी जलस्तर निगरानी प्रणाली
नेपाल में कई नदी निगरानी केंद्र हैं। इनमें लगे उपकरण नदी के जलस्तर और बहाव को मापते हैं और आंकड़े निगरानी केंद्रों तक भेजते हैं। नदियों के लिए चेतावनी और खतरे का स्तर भी तय किया जाता है, ताकि पानी एक निश्चित स्तर तक पहुंचने पर चेतावनी जारी की जा सके।
स्वचालित मौसम निगरानी प्रणाली
नेपाल में स्वचालित मौसम केंद्रों के जरिए बारिश और मौसम से जुड़े आंकड़े जुटाए जाते हैं। इनका इस्तेमाल मौसम की स्थिति समझने और बाढ़ के पूर्वानुमान में किया जाता है।
मौसम रडार
नेपाल में मौसम रडार भी हैं, जिनका इस्तेमाल बारिश और मौसम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए किया जाता है। इससे भारी बारिश जैसी घटनाओं की निगरानी में मदद मिलती है।
हिमपात निगरानी प्रणाली
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ और हिमपात की स्थिति पर नजर रखने के लिए स्वचालित हिमपात केंद्र मौजूद हैं। इनसे हिमालयी क्षेत्रों में बर्फ से जुड़े बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
नेपाल के मौजूदा सिस्टम
- फोटो : Amar Ujala
हिमनद और हिमनद झील निगरानी
नेपाल में हिमनद और हिमनद झीलों की निगरानी भी की जाती है। इसके तहत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फ, हिमनद और झीलों में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है, ताकि उनसे जुड़े संभावित खतरों को पहचाना जा सके।
फ्लैश फ्लड पूर्वानुमान प्रणाली
आईसीआईएमओडी की फ्लैश फ्लड पूर्वानुमान प्रणाली नेपाल के 12,428 नदी खंडों के लिए संभावित फ्लैश फ्लड का अनुमान लगाती है और 54 घंटे पहले तक खतरे का पूर्वानुमान दे सकती है। इसमें बारिश और मौसम से जुड़े पूर्वानुमानों के आधार पर नदियों में संभावित पानी के बहाव का अनुमान लगाया जाता है।
इस व्यवस्था में बाढ़ के संभावित खतरे को अलग-अलग रंगों से दिखाया जाता है। नीला सामान्य स्थिति, पीला बढ़ा हुआ खतरा, नारंगी गंभीर खतरा और लाल बहुत ज्यादा बाढ़ के खतरे को दर्शाता है।
हालांकि, आईसीआईएमओडी के मुताबिक, यह व्यवस्था मुख्य रूप से तेज बारिश, गरज और स्थानीय मौसम से पैदा होने वाली फ्लैश फ्लड का पूर्वानुमान लगाने के लिए तैयार की गई है।
लंबी अवधि की नदी बहाव पूर्वानुमान प्रणाली
बड़ी नदियों के लिए अलग पूर्वानुमान व्यवस्था भी है। आईसीआईएमओडी के अनुसार, यह प्रणाली 519 नदी खंडों के लिए 10 दिन तक नदी के संभावित बहाव का अनुमान देती है।
सामुदायिक बाढ़ चेतावनी व्यवस्था
नेपाल में चेतावनी को स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के लिए सामुदायिक स्तर की शुरुआती चेतावनी व्यवस्था भी विकसित की गई है। इसका उद्देश्य बाढ़ की जानकारी को स्थानीय समुदायों तक समय पर पहुंचाना है।
नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़।
- फोटो : अमर उजाला
रासुवा में बाढ़ कैसे आई?
रासुवा में आई बाढ़ का कारण सामान्य तेज बारिश नहीं था। शुरुआती वैज्ञानिक आकलन में ऊंचाई वाले ल्हेंदे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मलबे के बहाव की बात सामने आई। उपग्रह विश्लेषण के अनुसार 600 मीटर से ज्यादा चौड़े हिमनद का एक हिस्सा करीब 1,200 मीटर नीचे गिरा, जिससे बर्फ, चट्टान, पानी और मलबा तेजी से नीचे आया और भोटेकोशी नदी तंत्र में शक्तिशाली बाढ़ की लहर पैदा हुई।
घटना इतनी तेज थी कि इससे भूकंप जैसी भूकंपीय तरंग पैदा हुई। शुरुआत में इसे भूकंप से जोड़ा गया, लेकिन बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के विश्लेषण में इसे हिमनद के टूटने और मलबे के बहाव से जोड़कर देखा गया। हालांकि नदी के अस्थायी रूप से रुकने या पानी जमा होने जैसी किसी प्रक्रिया की भूमिका रही थी या नहीं, इसकी पूरी जांच अभी जारी है।
ऐसी बाढ़ में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाल की मौजूदा चेतावनी व्यवस्था नदी में बाढ़ आने के बाद उसके बढ़ते जलस्तर को पकड़ सकती है, लेकिन बाढ़ पैदा करने वाली घटना अगर ऊंचाई वाले क्षेत्र में हो तो उसे स्रोत पर पकड़ना ज्यादा मुश्किल है। हिमनद टूटने, बर्फ-चट्टान गिरने या भूस्खलन जैसी घटना के बाद जब तक उसका असर नीचे नदी में लगे निगरानी केंद्र तक पहुंचता है, तब तक चेतावनी के लिए मिलने वाला समय काफी कम हो सकता है।
यानी यहां सवाल सिर्फ यह नहीं है कि चेतावनी व्यवस्था मौजूद थी या नहीं। असली सवाल यह है कि बाढ़ पैदा करने वाली घटना का पता कब चला और लोगों तक चेतावनी पहुंचने से पहले कितना समय बचा।
नेपाल में भोटेकोशी नदी में बाढ़ की पूरी टाइमलाइन।
- फोटो : अमर उजाला
रासुवा में चेतावनी का समय कितना कम था?
- सुबह 08:37 बजे: तिब्बत क्षेत्र में हिमस्खलन के चलते भूमिगत हलचल दर्ज की गई। बर्फ और चट्टान के इस मलबे ने नेपाल-चीन सीमा पर बहने वाली ल्हेन्दे नदी को अवरुद्ध कर दिया, जिससे वहां एक अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया।
- सुबह 08:40 बजे: रसुवा के स्याफ्रुबेंसी में जल-स्तर की निगरानी करने वाले स्टेशन ने अपना अंतिम डेटा दर्ज किया, जिसमें नदी का स्तर 1.62 मीटर था।
- सुबह 08:50 बजे: हिमस्खलन के बाद हुई भूमिगत हलचल के ठीक 13 मिनट बाद स्याफ्रुबेंसी मॉनिटरिंग स्टेशन ने काम करना बंद कर दिया और डेटा ट्रांसमिशन रुक गया।
- सुबह 09:05 बजे: अधिकारियों को सूचना मिली कि तिब्बत की तरफ से भोटकोशी नदी में एक बहुत बड़ी बाढ़ की लहर घुस चुकी है।
- सुबह 9:15 से 9:16 बजे के बीच रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन के संवेदनशील इलाकों में मोबाइल संदेश भेजे गए। कुल भेजे गए संदेशों की संख्या छह लाख से ज्यादा थी।
बाढ़ नीचे पहुंचने के बाद पानी कितनी तेजी से बढ़ा?
आईसीआईएमओडी के अनुसार, बाढ़ की लहर नीचे की ओर बेहद तेजी से बढ़ी। गल्छी में करीब 30 मिनट में नदी का जलस्तर लगभग नौ मीटर बढ़ा, जबकि मलेखु में करीब सात मीटर की बढ़ोतरी दर्ज हुई। कई नदी निगरानी केंद्रों को भी नुकसान पहुंचा या वे बह गए। इतनी तेजी से जलस्तर बढ़ने पर चेतावनी मिलने के बाद भी लोगों के पास सुरक्षित स्थान तक पहुंचने के लिए बहुत कम समय बचता है।
पहले बाढ़ चेतावनी व्यवस्था को लेकर क्या कहा जा चुका है?
आईसीआईएमओडी ने पहले बताया था कि नेपाल में छोटी और मध्यम नदियों पर निगरानी उपकरण लगाना मुश्किल और महंगा है। कई जगह बाढ़ आने और चेतावनी मिलने के बीच का समय भी बहुत कम होता है। तकनीकी चेतावनी व्यवस्था कई जगह बड़ी नदियों पर ज्यादा केंद्रित है, जबकि कई छोटी नदियों और धाराओं के लिए पर्याप्त चेतावनी व्यवस्था नहीं है।
आईसीआईएमओडी ने 2023 में नेपाल के पूर्वी कोशी प्रांत में हुई बाढ़ को लेकर भी बताया था कि सामान्य से कम मानसून के अनुमान के बावजूद एक रात हुई तेज बारिश ने बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति पैदा कर दी थी। इस घटना में पांच लोगों की मौत हुई और 28 लोग लापता हुए थे। उस समय कहा गया था कि कम बारिश का अनुमान बाढ़ के कम खतरे की गारंटी नहीं है, क्योंकि कम समय में होने वाली अत्यधिक बारिश भी बड़ी तबाही ला सकती है।
क्या हर अचानक आने वाली बाढ़ का पहले से पता लगाया जा सकता है?
जरूरी नहीं। फ्लैश फ्लड का पूर्वानुमान लगाने वाली व्यवस्था मुख्य रूप से मौसम और बारिश से जुड़े आंकड़ों पर काम करती है। लेकिन अगर किसी पहाड़ी इलाके में अचानक हिमनद टूट जाए, बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा नीचे गिर जाए या भूस्खलन नदी को रोक दे, तो घटना बहुत तेजी से बदल सकती है। इसलिए नदी में पानी बढ़ने का पूर्वानुमान लगाना और बाढ़ पैदा करने वाली पहाड़ी घटना को पहले पहचानना, दोनों अलग-अलग चुनौतियां हैं।
क्या हैं चुनौतियां?
- फोटो : Amar Ujala
ऐसी घटनाओं के लिए निगरानी कैसे बेहतर की जा सकती है?
विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि निगरानी केवल नदी में पानी बढ़ने के बाद नहीं होनी चाहिए। खतरे का पता उसके स्रोत के जितना संभव हो उतना करीब लगाने की जरूरत है। इसके लिए उपग्रह तस्वीरों और भू-भाग के अध्ययन से अस्थिर हिमनदों, खतरनाक ढलानों और तेजी से बदल रही हिमनद झीलों की पहचान की जा सकती है।
भूकंपीय निगरानी और नदी निगरानी को जोड़ने की जरूरत भी बताई गई है। हिमनद टूटने या बड़े मलबे के बहाव से असामान्य भूकंपीय संकेत पैदा हो सकते हैं। ऐसे संकेतों की तुरंत जांच करके जरूरत पड़ने पर नीचे के इलाकों में चेतावनी भेजी जा सकती है।
नेपाल और चीन के बीच सूचना साझा करना क्यों जरूरी है?
रासुवा की घटना सीमा के पास हुई। ऐसे में सिर्फ नेपाल के भीतर की निगरानी पर्याप्त नहीं है। विशेषज्ञों ने नेपाल और चीन के बीच मौसम की जानकारी के साथ-साथ नदी में अचानक रुकावट, असामान्य जलप्रवाह, हिमनद झीलों की स्थिति, भूस्खलन, बर्फ-चट्टान गिरने और हिमनद टूटने जैसी घटनाओं की जानकारी भी तेजी से साझा होनी चाहिए।
बाद में सीमा पार से मिली जानकारी के आधार पर नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण व प्रबंधन प्राधिकरण ने दूसरी संभावित बाढ़ की चेतावनी भी जारी की थी। अगर ऐसी जानकारी पहले मिल जाए तो नीचे के इलाकों में चेतावनी और बचाव की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल सकता है।